देश में राजनीतिक पार्टियां दलितों का मुद्दा लेकर केंद्र सरकार पर आरोप लगा रही हैं। एक तरफ कांग्रेस धरना दे रही है तो वहीं दूसरी तरफ केंद्र सरकार विपक्ष पर भ्रम फैलाने का आरोप लगा रही है। इसी मामले पर अब उपमुख्यमंत्री ललित मोदी ने मायावती पर निशाना साधते हुए कहा है कि उन्होंने मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए एससी-एसटी एक्ट को शिथिल कर दिया था और आज केंद्र सरकार पर आरोप लगा हिंसा भड़काने का काम कर रही हैं। उन्होंने कहा मायावती ने अपने शासन के दौरन दो-दो शासनादेश निकाल एक्ट को न केवल कमजोर किया बल्कि कानून का उल्लंघन करने पर दंडित करने के आदेश भी दिए थे।
उन्होंने आगे कहा कि
नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने कानून को मजबूत करने के लिए 2016 में संशोधन किया था। मायावती आज केंद्र पर एक्ट शिथिल करने का आरोप लगा रही हैं जिस पर केंद्र ने नहीं बल्कि सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है। उन्होंने कहा कि मायावती सरकार के मुख्यसचिव शंभुनाथ ने 2007 में अध्यादेश जारी कर कहा था कि एससी-एसटी एक्ट के तहत महज शिकायत पर ही लोगों को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा क्योंकि इस कानून का इस्तेमाल निर्दोष लोगों को फंसाने के लिए किया जा रहा है। मोदी ने कहा कि शंभुनाथ ने अपने अध्यादेश में ये भी कहा था कि किसी भी शिकायत के आने पर पहले जांच की जाएगी। अगर उसके बाद ही कोई व्यक्ति आरोपी साबित होता है तभी उसे गिरफ्तार किया जा सकता है।
मोदी ने कहा कि दलित अत्याचार एक्ट वीपी सिंह ने बनाया था जिसे नरेंद्र मोदी सरकार ने और भी मजबूत किया। मोदी ने ऐसे ही एक दूसरे अध्यादेश का जिक्र करते हुए कहा कि मायावती सरकार ने आदेश दिया था कि हत्या और बलात्कार के अलावा बाकी सभी मामलों में आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत ही मामला दर्ज किया जाएगा। मोदी ने कहा कि आदेश में ये भी था कि अगर कोई दलित किसी पर बलात्कार का आरोप लगाती है तो मेडिकल जांच में आरोप की पुष्टि के बाद ही एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया जाएगा। उन्होंने कहा आज
मायावती की बसपा और अन्य विपक्षी पार्टियां सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर एनडीए सरकार पर आरोप लगा अनुसूचित जाति- जनताति के लोगों को भड़का रही हैं।