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दुष्कर्म पीड़िता की गिरफ्तारी पर वकीलों का पटना हाईकोर्ट को पत्र, दखल देने की मांग

Wed, 15 Jul 2020 11:10 PM IST
गौरव पाण्डेय पीटीआई, पटना
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पटना उच्च न्यायालय
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बिहार में कथित तौर पर सामूहिक दुष्कर्म की पीड़िता को जेल भेजे जाने पर देशभर के जाने-माने वकीलों ने विरोध जताते हुए बुधवार को पटना उच्च न्यायालय से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की। बता दें कि बिहार के अररिया जिला की एक अदालत के समक्ष पीड़िता अपनी उक्त दोनों सहयोगियों के साथ बयान दर्ज कराने गई थी। अदालत की अवमानना के आरोप में उन्हें हिरासत में ले लिया गया था।

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पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और अन्य न्यायाधीशों को संबोधित 376 अधिवक्ताओं ने हस्ताक्षरित पत्र लिखा। इसमें कहा गया कि 22 वर्षीय पीड़िता और उसकी दो सहयोगी सामाजिक कार्यकर्ताओं को 10 जुलाई को भादंवि की धारा 164 के तहत न्यायिक दंडाधिकारी के समक्ष बयान दर्ज कराने के वक्त न्यायिक हिरासत में लेकर समस्तीपुर जिले की दलसिंहसराय जेल भेज दिया गया था।

इंदिरा जयसिंह, प्रशांत भूषण और वृंदा ग्रोवर जैसे दिग्गज वकीलों द्वारा हस्ताक्षरित उक्त पत्र में कहा गया है इस घटना को बहुत ही संवेदनशील होकर देखा जाना चाहिए। पीड़िता अपने साथ घटित घटना को बार-बार पुलिस और अन्य लोगों को बताने के कारण मानसिक तनाव में थी। उसके द्वारा दुर्व्यवहार को संवेदना के साथ देखे जाने की जरूरत है। जबकि पीड़िता की नाजुक स्थिति को समझने के बजाए उसे जेल भेज दिया गया।
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अररिया जिला स्थित सामाजिक संगठन जन जागरण शक्ति संस्थान के सचिव आशीष रंजन झा ने बताया कि दर्ज कराई गई प्राथमिकी के अनुसार छह जुलाई को पीड़ित युवती के एक परिचित युवक से मोटरसाइकिल चलाना सीखने गई थी। घर लौटने के दौरान चार अज्ञात लोगों ने उसके साथ कथित तौर पर सामूहिक दुष्कर्म किया था ।

पीड़िता ने अपने परिजनों के भय के कारण जन जागरण शक्ति संस्थान की अपनी एक परिचित फोन किया। उसके बाद उक्त संगठन की अन्य सहयोगियों की मदद से अररिया के महिला थाने में सात जुलाई को प्राथमिकी दर्ज कराई थी।

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