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बिहार: एक साल में ही बदल गया दही-चूड़ा का राजनीतिक स्वाद

Mon, 15 Jan 2018 11:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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इस बार बिहार में महज एक साल में ही मकर संक्रांति के मौके पर दही-चूड़ा का राजनीतिक स्वाद बदल गया। पिछले एक साल में ऐसी खिचड़ी पकी कि पांच साल बाद जदयू और भाजपा के नेता एक दूसरे को तिलकुट खिलाते दिखे। जबकि एक साल पहले नीतीश को दही का टीका लगाने वाले राजद सुप्रीमो के घर सन्नाटा पसरा रहा।

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वैसे, जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह के घर हर साल की तरह इस बार भी दही-चूड़ा के भोज का आयोजन हुआ। भोज के दौरान चर्चा का केंद्र जेल में बंद लालू प्रसाद ही रहे। जदयू के प्रदेश अध्यक्ष के निमंत्रण पर सबसे पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जदयू कार्यालय पहुंचे। उनके साथ विधानसभा अध्यक्ष विजय चौधरी पहुंचे। जदयू का तिल खाने पहुंचे उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने भोज में विरोधी पार्टियों के नेताओं को निमंत्रण देने के सवाल पर उन्होंने कहा कि मुझे नहीं पता किसे निमंत्रण भेजा गया है और किसे नहीं। मैं बिहार में सालों से रह रहा हूं, लेकिन आज तक लालू प्रसाद की तरफ से कभी निमंत्रण नहीं आया।

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जदयू का तिल खाने पहुंचे पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष

रविवार को कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक चौधरी जैसे ही विधायक मुन्ना तिवारी और दिलीप चौधरी के साथ जदयू का तिल खाने जदयू प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ बाबू के घर पहुंचे, सबकी नजर उन पर ही ठहर गई। इस दौरान अशोक चौधरी ने कहा कि राजनीति में ना कोई शुरुआत होती है और ना ही पूर्ण विराम होता है। उन्होंने कहा कि वशिष्ठ बाबू से मेरे पुराने संबंध हैं।

महागठबंधन टूटने के बाद भी मैं कई बार उनसे मिलता रहा हूं और  इस पर कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए। गौरतलब है कि मकर संक्रांति से ठीक एक दिन पहले विधायक दल के नेता सदानंद सिंह के आवास पर कांग्रेस नेताओं की आपात बैठक बुलाई गई थी, जिसमें तमाम विधायकों को आमंत्रित किया गया था। इस दौरान अशोक चौधरी और उनके समर्थक विधायक बैठक से नदारद रहे। 
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