पूर्वी चंपारण जिले के केसरिया प्रखंड में मनरेगा योजना के तहत कराए गए पुलिया निर्माण को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। ढेकहा पंचायत के गंडक नदी की पेटी (चेवर) में बिना सड़क और संपर्क मार्ग के चार पुलियों का निर्माण चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और योजना से जुड़े लोगों की मिलीभगत से सरकारी राशि की बंदरबांट की गई है।
नदी के बीच पुलिया, लेकिन सड़क का नामोनिशान नहीं
स्थानीय लोगों के अनुसार, पंचायत के वार्ड संख्या-4 स्थित मझरिया गांव में नदी क्षेत्र के भीतर दो पुलियों का निर्माण कराया गया है। इनमें एक पुलिया ऐसे स्थान पर बनी है, जहां न कोई सड़क है और न ही नियमित आवागमन की सुविधा। दूसरी पुलिया की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का दावा है कि निर्माण कार्य में मानकों की अनदेखी की गई है।
वार्ड 11 में भी दो पुलियां, उपयोगिता पर उठे सवाल
यही नहीं, वार्ड संख्या-11 में भी दो अन्य पुलियों का निर्माण कराया गया है। इनमें एक गाइड बांध के समीप तथा दूसरी सतरघाट माई स्थान के पास नदी क्षेत्र में स्थित है। इन पुलियों के आसपास भी कोई समुचित संपर्क मार्ग नहीं है। ऐसे में ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि आखिर इन योजनाओं का चयन किस आधार पर किया गया।
फोटो-वीडियो वायरल, गांव में चर्चा तेज
पुलियों के फोटो और वीडियो सामने आने के बाद पूरे इलाके में चर्चा तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि जहां सड़क ही नहीं है, वहां पुलिया निर्माण कर सरकारी धन को ठिकाने लगाने का काम किया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि मनरेगा जैसी गरीबों के रोजगार और विकास की योजना कुछ लोगों के लिए कमाई का जरिया बन गई है।
अधिकारियों का दावा- ग्रामीणों की मांग पर हुआ निर्माण
हालांकि, मनरेगा कार्यक्रम पदाधिकारी आशुतोष कुमार ने बताया कि स्थल निरीक्षण के दौरान ग्रामीणों द्वारा पुलिया निर्माण की आवश्यकता बताई गई थी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पुलिया पर लगभग साढ़े चार लाख रुपये खर्च हुए हैं।
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जांच की मांग, निगरानी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न
अब सवाल यह है कि जब स्थल पर न सड़क है और न ही स्पष्ट आवागमन, तब लाखों रुपये खर्च कर पुलिया निर्माण की जरूरत क्यों पड़ी? मामले ने मनरेगा योजनाओं के चयन, क्रियान्वयन और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।