मधुश्रावणी पर्व के दौरान नव विवाहित जोड़े और अन्य लोग
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बिहार के दरभंगा में लोक गीतों के बीच मिथिला क्षेत्र में नवविवाहिताओं का महापर्व मधुश्रावणी परंपरागत विधि-विधान के साथ संपन्न हो गया। मलमास के कारण करीब डेढ़ महीने तक चले इस महापर्व में नवविवाहिताओं को सुखद और सफल दांपत्य जीवन की शिक्षा दी गई। सावन महीने के कृष्ण पक्ष पंचमी से शुरू यह पर्व शुक्ल पक्ष की तृतीया को टेमी दागने की रस्म के साथ संपन्न हुआ।
पूरे पर्व के दौरान विभिन्न कथाओं के माध्यम से नवविवाहिताओं को दांपत्य जीवन के हर पहलुओं की बारीकी से जानकारी महिला पुरोहितों के द्वारा दी जाती है। इस दौरान विधि-विधान के साथ पूजन कर नव विवाहिताएं अपने सुहाग की सलामती का आशीर्वाद ईश्वर से मांगती हैं। पूरे पर्व के दौरान प्रतिदिन फूल लोढ़कर नव विवाहिताओं ने बासी फूलों से अगले दिन गौरी, महादेव, विषहर सहित अन्य देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना की। मधुश्रावणी के अंतिम दिन सुबह से ही व्रतियों के आंगन में खास चहल-पहल रही।
इस पर्व की सबसे खास बात यह है कि इसमें यजमान के साथ ही पुरोहित की भूमिका भी महिलाएं ही निभाती हैं। आम तौर पर यह पर्व एक पखवाड़े तक चलता है। लेकिन इस बार सावन महीने में मलमास होने के कारण इस बार यह पर्व पूरे 44 दिनों का रहा। इस अवसर पर नवविवाहिताओं ने नाग देवता की विशेष पूजा कर विसर्जन किया।
पौराणिक कथाओं के अनुसार इस अवधि में नाग देवता की विशेष पूजा के साथ ही शिव-गौरी की पूजा से महिलाएं जीवन पर्यंत सुहागन बनी रहती हैं। इस अवधि में वे अपनी ससुराल से आए वस्त्रत्त् और भोजन सामग्री का उपभोग करती हैं।