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कन्हैया बेगूसराय के लिए राजद की आस देखते रहे, इधर लेफ्ट के लिए लालू ने छोड़ दी आरा सीट

Sat, 13 Apr 2019 01:14 PM IST
अजय सिंह अजय कुमार सिंह, नई दिल्ली
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कन्हैया कुमार और राजू यादव - फोटो : अमर उजाला
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जेएनयू के छात्र नेता और बिहार के बेगूसराय से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के उम्मीदवार कन्हैया कुमार वैसे तो हमेशा सुर्खियों में रहते हैं, लेकिन आजकल कुछ ज्यादा ही चर्चा में हैं। क्योंकि केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह से उनकी सीधी टक्कर सियासी अखाड़े में हो रही है। हालांकि, यहां से महागठबंधन के उम्मीदवार तनवीर हसन ने लड़ाई को त्रिकोणात्मक बना दिया है। चुनाव के एलान से पहले माना जा रहा था कि महागठबंधन बेगूसराय में अपना उम्मीदवार नहीं देगा, लेकिन लेफ्ट और कन्हैया कुमार की रणनीति धरी की धरी रह गई। महागठबंधन में कांग्रेस, राजद, उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी आरएसएलपी, जीतनराम मांझी की पार्टी हम और सन ऑफ मल्लाह के नाम से मशहूर युवा नेता मुकेश सहनी की पार्टी वीआईपी ने एक साथ मिलकर चुनाव लड़ने का एलान किया और लेफ्ट पार्टियां सीपीआई, सीपीएम बाहर रह गईं।

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लालू ने कन्हैया को क्यों नहीं दिया समर्थन?
लेफ्ट पार्टियां बिहार में महागठबंधन में शामिल होने के लिए छह सीटें मांग रही थीं, जिनमें बेगूसराय, आरा, सीवान और जहानाबाद लोकसभा सीटें शामिल थीं, लेकिन राजद बेगूसराय सीट छोड़ने को तैयार नहीं हुई। वामदल के एक नेता ने यहां तक कहा कि राजद के लोग कन्हैया से चिढ़ते हैं और ये कुछ लोगों का भी मानना है। अब सवाल ये है कि कन्हैया से लालू परिवार को क्या डर है? राजनीतिक जानकारों का मानना है कि लालू यादव नहीं चाहते कि बिहार में तेजस्वी यादव का कोई विकल्प तैयार हो, क्योंकि महागठबंधन से समर्थन मिलने के बाद कन्हैया कुमार की जीत की संभावना तो बढ़ ही जाती, साथ ही उनकी धमक बिहार की राजनीति पर भी तेजी से उभरती। ऐसे में तेजस्वी यादव के लिए खतरा हो सकता था।  इसलिए राजद ने कन्हैया कुमार का समर्थन नहीं किया, क्योंकि सीपीआई के एक नेता ने कहा था कि गठबंधन को लेकर कांग्रेस से बातचीत फाइनल है, लेकिन राजद इसमें रोड़ा अटका रहा। 

भाकपा माले  के लिए लालू ने क्यों छोड़ी आरा लोकसभा सीट 
राजद ने आरा लोकसभा सीट भाकपा माले के लिए छोड़ दी है। अब सवाल उठता है कि लालू यादव ने ये सीट माले के लिए क्यों छोड़ी? तो सबसे पहले बात करते हैं यहां से भाकपा माले के उम्मीदवार के बारे में।  इस सीट से भाकपा माले ने राजू यादव को उम्मीदवार बनाया है। राजू यादव यहां से लोकसभा चुनाव पहले भी माले के टिकट पर लड़ चुके हैं। हालांकि पिछले चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। राजू यादव को संघर्षशील नेता के तौर पर जाना जाता है।
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कौन हैं आरा से भाकपा माले के उम्मीदवार राजू यादव
राजू यादव के पिता आर टी सिंह, जो सेना में 1965 से 1971 तक नायक पद पर कार्यरत थे। 1971 में उन्होंने सेना की नौकरी छोड़ दी और भाकपा माले में शामिल हो गए और जगदीश महतो, रामनरेश राम और रामेश्वर यादव के साथ आंदोलन में कूद गए। बता दें कि जगदीश महतो आरा जैन स्कूल में शिक्षक हुआ करते थे, लेकिन सामजिक बदलाव को लेकर संघर्ष छेड़ दिया था, जिसमें राजू यादव के पिता आर टी सिंह भी नौकरी छोड़कर इस आंदोलन में कूद गए। बताया जाता है कि राजू यादव जब मात्र 4 वर्ष के थे, उनके पिता का देहांत हो गया। छात्र जीवन से राजू यादव संघर्षशील रहे हैं। छात्रों से जुड़े सवालों को हमेशा उठाते रहते हैं। 

मीसा भारती की जीत के लिए राजद का सियासी दांव?

राजू यादव की छवि को देखकर ही महागठबंधन ने यहां से अपना समर्थन दिया है। हालांकि सूत्र ये भी बता रहे हैं कि लालू यादव का इसमें सियासी खेल है। कहा जा रहा है कि पाटलिपुत्र से बेटी मीसा भारती की जीत के लिए लालू यादव ने आरा में भाकपा माले का समर्थन किया है, क्योंकि भाकपा माले ने भी पाटलिपुत्र लोकसभा सीट पर राजद प्रत्याशी मीसा भारती को समर्थन देने का एलान किया है। पाटलिपुत्र सीट पर पिछले चुनाव में भाकपा माले को जितने वोट मिले थे, उससे कम वोट से मीसा भारती चुनाव हारी थीं। वर्ष 2014 में भाजपा प्रत्याशी रामकृपाल यादव ने जीत दर्ज की थी। तब दूसरे स्थान पर रहीं राजद उम्मीदवार मीसा भारती करीब 40,000 वोट से हारी थीं। उससे ज्यादा करीब 51,000 वोट माले प्रत्याशी रामेश्वर प्रसाद को मिले थे। 
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