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Khagaria Lok Sabha : बाहरी उम्मीदवार लाकर घर की बात कह रहे चिराग; क्या काम आएगा यह दांव या भारी पड़ेगा वामपंथ

Fri, 19 Apr 2024 07:23 AM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, खगड़िया

सार

सात नदियों से घिरे खगड़िया लोकसभा क्षेत्र में करीब 17 लाख वोटर हैं। इनमें पुरुषों की आबादी 893,986 और महिलाओं की संख्या 793,640 है। यहां सबसे निर्णायक भूमिका में यादव वोटर होते हैं। वहीं दूसरे नंबर पर मुस्लिम समुदाय आते हैं। 
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पिता का श्राद्ध कराते समय पूरे कुनबे को खगड़िया में जुटाकर चिराग ने पहले ही दिया था संकेत। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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खगड़िया लोकसभा सीट 2014 और 2019 में लोजपा के खाते में गई थी। यहां से चौधरी महबूब अली कैसर दो बार भारी बहुमत से संसद पहुंचे थे। जबकि इस बार लोजपा राजेश वर्मा पर दांव आजमा रही है। तीसरी बार खगड़िया सीट को जीतना लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के लिए प्रतिष्ठा की बात बन चुकी है।  अपने गृह जिला होने के कारण चिराग पासवान किसी भी कीमत पर खगड़िया में एक बार फिर लोजपा को जीत दिलाने के लिए कोई कसर छोड़ना नहीं चाह रहे हैं। खगड़िया पहुंचे चिराग पासवान ने अपने पिता दिवंगत रामविलास पासवान का जिक्र करते हुए इस सीट को अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ दिया है। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि क्या चिराग की पार्टी खगड़िया के किले को फतह कर पाएगी? क्या चिराग अपने नए-पुराने सहयोगियों को एक सूत्र में बांध पाएंगे? वर्तमान सांसद चौधरी महबूब अली कैसर में लोजपा से बगावत कर दी है। उन्होंने गुरुवार को सीपीआईएम उम्मीदवार संजय कुमार सिंह को अपना समर्थन दिया है। आइए जानते हैं खगड़िया लोकसभा का चुनावी गणित...

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महागठबंधन दे रहा कड़ी टक्कर
खगड़िया लोकसभा सीट के लिए एक तरफ जहां राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की तरफ से सभी जोर आजमाइश किए जा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ महागठबंधन भी जीत के लिए कोई कोर कसर छोड़ने की फिराक में नहीं है। महागठबंधन ने अपने उम्मीदवार के रूप में खगड़िया सीट सीपीआई (एम) को दिया है। ऐसे में एनडीए के लिए खगड़िया के किले को जीत पाना आसान नहीं होगा। 

जानिए, यहां का चुनावी समीकरण
सात नदियों से घिरे खगड़िया लोकसभा क्षेत्र में करीब 17 लाख वोटर हैं। इनमें पुरुषों की आबादी 893,986 और महिलाओं की संख्या 793,640 है। यहां सबसे निर्णायक भूमिका में यादव वोटर होते हैं। वहीं दूसरे नंबर पर मुस्लिम समुदाय आते हैं। जबकि तीसरा नंबर निषाद समुदाय का है। आंकड़ों की अगर बात करें तो खगड़िया लोकसभा क्षेत्र में यादव वोटरों की संख्या 340000 के करीब है। जबकि निषाद और मुस्लिम वोटर डेढ़-डेढ़ लाख हैं। यानी यह तीन जातियां चुनाव में अहम भूमिका में हैं। जो अगर वोट में तब्दील होकर किसी उम्मीदवार के पक्ष में चला जाए तो उसकी जीत लगभग तय मानी जा सकती है। वहीं कुर्मी और कुशवाहा दोनों जातियों के मतदाताओं को मिला दें तो इनकी संख्या ढाई लाख के करीब है। जबकि सवर्ण समुदाय के भी डेढ़ लाख मतदाता हैं। 
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खगड़िया से 16 सांसद पहुंचे हैं लोकसभा
साल 1957 में पहली बार खगड़िया से कांग्रेस के जियालाल मंडल ने जीत दर्ज की थी। जो 1962 में भी लोकसभा पहुंचे। जबकि 1967 के चुनाव में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के कामेश्वर प्रसाद सिंह ने जीत का परचम लहराया था। सन् 1971 के लोकसभा चुनाव में भी इसी पार्टी के उम्मीदवार शंकर प्रसाद यादव ने भारी मतों से जीत दर्ज की थी। वहीं वर्ष 1977 के चुनाव में खगड़िया सीट जनता पार्टी को मिला था। जिससे ज्ञानेश्वर प्रसाद यादव ने जीत दर्ज की। इसी तरह बितते समय के साथ 1980 में खगड़िया सीट कांग्रेस की झोली में चली गई। कांग्रेस के उम्मीदवार सतीश प्रसाद सिंह ने यहां से जीत दर्ज कर लोकसभा में प्रवेश किया।  वहीं 1984 में कांग्रेस, वर्ष 1989, 1991 और 1996 में जनता दल, 1998 में समता पार्टी, 1999 में जनता दल (यूनाइटेड), 2004 में राष्ट्रीय जनता दल, 2009 में जनता दल (यू) की झोली में गई। इसके बाद 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में लोक जनशक्ति पार्टी ने अपना परचम लहराया। 

जदयू और भाजपा के कार्यकर्ताओं में नाराजगी
लोजपा प्रमुख चिराग पासवान के लिए एक तरफ जहां खगड़िया सीट प्रतिष्ठा का सबक बन चुका है। वहीं दूसरी तरफ उनके लिए एनडीए सहयोगियों को भी सहेजना टेढ़ी खीर के समान है। हालांकि गठबंधन की तरफ से एक जुटता की बात तो कहीं जा रही है, बावजूद इसके बताया जा रहा है कि कुछ जदयू खेमा और कुछ भाजपा कार्यकर्ता अपनी नाराजगी संगठन की बैठक में जता चुके हैं। हालांकि चिराग को इन सभी बातों का इल्म है। अब देखना यह है कि अपने गृह जिले में चिराग पासवान अपने पिता की विरासत का वोट एकजुट कर पाते हैं या नहीं?

12 बार बाहरी को लोगों ने चुना सांसद
खगड़िया लोकसभा सीट 6 विधानसभा मिलकर बनाया गया है। जिसमें चार विधानसभा खगड़िया जिले में एक विधानसभा समस्तीपुर जिले में और एक विधानसभा सहरसा जिले से शामिल है। जब से खगड़िया जिले में लोकसभा क्षेत्र बना है, तब से खगड़िया लोकसभा क्षेत्र कभी बेगूसराय जिले के एक हिस्से में तो कभी भागलपुर जिले के एक हिस्से में पड़ा। अभी वर्तमान में समस्तीपुर के रोसरा विधानसभा और सहरसा के हसनपुर विधानसभा को मिलाकर खगड़िया लोकसभा क्षेत्र बना हुआ है। वहीं खगड़िया में अभी तक 16 सांसद बने हैं। जिसमें से मात्र चार स्थानीय निवासी खगड़िया जिले के सांसद बने हैं। इसलिए महागठबंधन के उम्मीदवार के लिए यह चक्रव्यूह तोड़ना आसान नहीं होगा। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने अपनी चुनावी सभा में बाहरी को वोट नहीं देने की अपील की है। बता दें कि लोजपा प्रत्याशी राजेश वर्मा राजेश वर्मा भागलपुर के रहने वाले हैं। राजेश वर्मा भागलपुर से 2020 में लोजपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव भी लड़ा था। वह भागलपुर के डिप्टी मेयर भी रह चुके हैं।

लोकसभा सीट पर जातियों का वोट प्रतिशत

  • यादव -16%
  • कोयारी +कुर्मी -12%
  • मुस्लिम- 9%
  • अगरी जाती-8%
  • मल्लाह -8%
  • पासवान -4%
  • मुसहर -5%
  • अन्य शिड्यूल कास्ट -9%
  • पंचकोनिया -29%
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