फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बिहार: सेवानिवृत्त प्राचार्यों के पद पर जमे रहने पर एलएनएमयू की कार्रवाई, तीन कॉलेजों के अनुदान खातों पर रोक

Tue, 27 Oct 2026 08:17 AM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दरभंगा

सार

ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय ने सेवानिवृत्त प्राचार्यों के पद पर बने रहने और निर्देशों की अनदेखी करने पर तीन संबद्ध कॉलेजों के अनुदान खातों से निकासी और सभी वित्तीय लेन-देन पर तत्काल रोक लगा दी है।

 

विज्ञापन
ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय ने सेवानिवृत्त प्राचार्यों के पद पर लगातार बने रहने और प्रशासनिक निर्देशों की अनदेखी करने के गंभीर मामले में तीन संबद्ध कॉलेजों पर बड़ी कार्रवाई की है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन तीनों कॉलेजों के अनुदान खातों से राशि की निकासी और हर प्रकार के वित्तीय लेन-देन पर तत्काल प्रभाव से पूरी तरह रोक लगा दी है। कुलसचिव की ओर से संबंधित बैंक शाखाओं को इस बाबत आधिकारिक निर्देश जारी कर दिया गया है।

विज्ञापन


कार्रवाई की जद में आए संस्थान
विश्वविद्यालय की इस सख्त कार्रवाई के तहत जिन कॉलेजों के बैंक खातों पर रोक लगाई गई है, उनमें दरभंगा स्थित महाराज महेश ठाकुर मिथिला कॉलेज, लहेरियासराय का नागेंद्र झा महिला कॉलेज और जाले स्थित काजी अहमद डिग्री कॉलेज शामिल हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार इन शिक्षण संस्थानों के प्रधानाचार्य अपनी अधिवर्षिता आयु पूरी कर सेवानिवृत्त हो चुके हैं, इसके बावजूद वे नियम विरुद्ध तरीके से अपने पदों पर जमे हुए थे। कुलसचिव ने बैंकों को भेजे पत्र में स्पष्ट लिखा है कि राज्य सरकार और विश्वविद्यालय से प्राप्त अनुदान राशि ही इन खातों में जमा है। इसलिए अगले सक्षम आदेश तक बैंक किसी भी प्रकार का भुगतान या लेन-देन न करें।

पढ़ें: विधान परिषद की 8 सीटों के लिए मतगणना शुरू अब होगी; जन सुराज पर सभी की नजर
विज्ञापन
विज्ञापन


स्मारपत्र का भी नहीं दिया जवाब
विश्वविद्यालय प्रशासन ने गत 3 अगस्त को पत्र जारी किया था। इसके तहत सभी सेवानिवृत्त प्राचार्यों, शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मियों को तुरंत कार्यमुक्त कर तीन दिन के भीतर अनुपालन रिपोर्ट मांगी थी। कॉलेजों की ओर से अनुपालन न होने और भेजे गए स्मारपत्र का भी कोई जवाब न मिलने पर विश्वविद्यालय ने यह कड़ा कदम उठाया है। विश्वविद्यालय के निर्देशों की लगातार अवहेलना के बाद हुई इस कार्रवाई से संबंधित कॉलेजों के प्रबंधन और प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें