पार्टी, परिवार में भारी उठापटक और खराब तबीयत से जूझ रहे लालू यादव आज 70 साल के हो गए। सुबह से ही राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद को जन्मदिन की बधाइयों का तांता लगा हुआ है। इस मौके पर तेजस्वी यादव के आवास पांच देशरत्न मार्ग में समारोह का आयोजन किया है। पार्टी की ओर से लालू प्रसाद की उम्र के बराबर 71 पाउंड का केक तैयार किया गया है, जिसे नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और विधायक तेजप्रताप यादव ने मांग राबड़ी देवी के साथ मिलकर काटा।
सियासी घमासान को साइड रख मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सहित कई नेताओं ने लालू प्रसाद को जन्मदिन की ट्वीट कर बधाई दी और उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की है।
पिछले दो दिनों लालू परिवार में जिस तरह से घमासान की खबरें आईं जिसे लालू के जन्मदिन की शुभकामनाओं ने धो दिया है। लालू के दोनों उत्तराधिकारियों के बीच मनमुटाव की खबरें आईं लेकिन उनके जन्मदिन के दिन तेज की बातें मान ली गईं हैं। पार्टी ने तेजप्रताप के करीबी राजेंद्र पासवान को पार्टी का महासचिव बना दिया गया है। इससे पहले बताया जा रहा था कि तेजप्रताप राजेंद्र पासवान को प्रदेश अध्यक्ष बनाना चाहते थे, जिसको लेकर विवाद शुरू हुआ था।
ट्वीट पर अपनी नाराजगी जाहिर करने के बाद तेजप्रताप ने बताया कि मैंने इस बारे में पापा को बताया, तो उन्होंने कहा कि तुम्हारी बात भी सही है पार्टी में जो लोग मनमानी कर रहे हैं हम उनको देखेंगे। वहीं दूसरी तरफ राबड़ी देवी भी मीडिया के सामने आईं और कहा कि हमारी पार्टी और परिवार में कोई विवाद नहीं है सबकुछ ठीक है।
वहीं दूसरी तरफ बिहार 2019 के चुनाव को लेकर राजनीतिक उठापटक तेज हो गई है। और इससबके केंद्र में रहे केंद्रीय मंत्री एवं राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा। कुशवाहा पर 'महागठबंधन' में शामिल होने के लिए राजद लगातार डोरे डाल रही है। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव की ओर से 'महागठबंधन' में शामिल होने के निमंत्रण भी कुशवाहा को भेजा गया जिसपर उपेन्द्र कुशवाहा ने कहा, "आरजेडी ने अपना आधार खो दिया है। आधार खोजने के लिए वे ऐसे बयान दे रहे हैं लेकिन वे मेरे लिए कुछ भी नहीं हैं। मोदी का देश हित में प्रधानमंत्री बने रहना जरूरी है। वह अगली बार भी प्रधानमंत्री होंगे।"
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि नीतीश और उपेंद्र एकसाथ एनडीए का हिस्सा बने नहीं रह सकते हैं। क्योंकि उपेंद्र कुशवाहा की राजनीति नीतीश के विरोध के इर्द-गिर्द घूमती रही है। ऐसे में बीजेपी के सामने यह बड़ी चुनौती है कि वह दोनों को एक साथ कैसे बनाए रखती है।