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बनारस से चुनाव लडना चाहते हैं 'बिहार के लादेन'

Tue, 15 Apr 2014 10:34 AM IST
पंकज प्रियदर्शी/बीबीसी संवाददाता, पटना, बिहार से
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नाम - हाजी खालिद नूर। लेकिन बिहार के लादेन के रूप में चर्चित। संगठन - राम (राष्ट्रीय आवामी मूवमेंट) इंडिया
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चुनावी मौसम में पटना के अपने दफ्तर में अकेले बैठे हाजी खालिद नूर काफी निराश हैं। व्यवस्था से, राजनेताओं से और मीडिया से भी

जब मैं उनसे मिलने पहुंचा तो बातचीत के दौरान उन्होंने हर विषय पर खुल कर बात की और मुझे बताया कि कैसे जब देश-विदेश में ओसामा बिन लादेन की चर्चा होती थी, तो उस दौर में उनका राजनीतिक इस्तेमाल किया गया।

राजनीतिक तैयारी
सबसे पहले रामविलास पासवान और फिर लालू प्रसाद यादव की रैलियों में उनके साथ मंच पर मौजूद रहने वाले हाजी खालिद नूर अब अपने संगठन राम इंडिया के माध्यम से नई तैयारी में लगे हैं।
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उनका कहना है कि उनके संगठन ने उनसे आग्रह किया है कि वे बनारस जाकर नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लडें, जिस पर वे गंभीरता से विचार कर रहे हैं।

बिहार का लादेन नाम के पीछे की वजह के जवाब में हाजी खालिद नूर कहते हैं, ''मीडिया ने इसको चलाया। उस जमाने में जब मैं राम विलास पासवान के साथ था और हम आरजेडी सरकार और लालू जी के खिलाफ खडे हुए थे।

उस समय ओसामा बिन लादेन अमरीका के खिलाफ सरगर्म थे और वे पूरी दुनिया में आकर्षण का केंद्र बने हुए थे। मैं इस्लामिक लिबास पहनता हूं और पगडी भी बांधता था, तो मीडिया ने सांकेतिक रूप से मुझे  बिहार का  लादेन कहना शुरू कर दिया। लेकिन मैं उस शख्सियत को स्वीकार नहीं करना चाहता हूं।''

उन्होंने बताया कि लादेन से संबोधन करना तो अच्छी बात नहीं क्योंकि वो उनका नाम नहीं है। और ये जिस शख्सियत का नाम है, वे उनसे अपनी तुलना करवाना पसंद नहीं करते।

हाजी खालिद नूर ने बताया कि जिस शख्सियत से उनका नाम जोडा जा रहा है, वे उनका मुकाबला नहीं कर सकते। ओसामा बिन लादेन को तो उन्होंने मीडिया के माध्यम से जाना था।

लेकिन बातचीत के क्रम में वे कहने लगे कि 'दुनिया ने लादेन को कहने का मौका नहीं दिया। आप कैसे कह सकते हो कि उनका रास्ता गलत है।'

मुसलमान मुख्यमंत्री
हाजी खालिद नूर का दावा है कि जब वे रामविलास पासवान के साथ गए थे तो उनके सिर्फ सात विधायक थे। उनकी स्थिति अच्छी नहीं थी।

उनका दावा है, "मेरे पासवान के साथ जुडने के बाद पार्टी को 29 सीटें आईं।"

उन्होंने बताया,''पासवान ने कहा था कि वे मुसलमान मुख्यमंत्री बनाएंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। क्योंकि लालू जी के साथ सहयोग की बात हुई, लेकिन वे भी मुसलमान मुख्यमंत्री के लिए तैयार नहीं हुए।''
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वर्ष 2005 में शायद ही कोई ऐसा मंच होगा, जब लालू यादव ने हाजी खालिद नूर के साथ मंच साझा न किया हो।

उनका कहना है कि अब भी वे राजद के साथ जुडे हुए हैं और न चाहते हुए भी उनसे संपर्क बना हुआ है, क्योंकि कोई विकल्प नहीं है।

नीतीश कुमार के मुद्दे पर वे कहते हैं, ''उनका एलायंस भाजपा के साथ रहा है। नीतीश जी का स्टैंड कभी क्लियर नहीं रहा। वे कन्फ्यूज रहे हैं। उनके लिए आडवाणी विकल्प थे,  मोदी नहीं। लेकिन हम दोनों के पक्ष में नहीं हैं।''

हाजी खालिद नूर ने राष्ट्रीय आवामी मूवमेंट नाम का एक संगठन बनाया है। जिसका मकसद हिंदू और मुसलमानों के बीच भरोसे को बढाना है।

अब इसी संगठन के बैनर तले वे चुनाव लडना चाहते हैं और वो भी बनारस से।
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