सुपौल जिला मुख्यालय स्थित गांधी मैदान दुर्गा मंदिर परिसर में शुक्रवार को सुप्रसिद्ध लोक गायिका शारदा सिन्हा के सम्मान में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। विभिन्न सामाजिक संगठनों की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में कई राजनेता, वरिष्ठ पत्रकार, डॉक्टर, व्यवसायी और युवा वर्ग के लोग शामिल हुए। इस दौरान दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की गई।
वहीं, पुष्प अर्पित करने के बाद कैंडल भी जलाया गया। इस दौरान सुपौल नगर परिषद के मुख्य पार्षद राघवेंद्र झा राघव ने सुपौल टाऊन हॉल का नाम शारदा सिन्हा नगर भवन करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि टाऊन हॉल बनकर तैयार है। लेकिन अभी नगर परिषद को हैंड ओवर नहीं किया गया है। जल्द ही बोर्ड की बैठक बुलाकर इस संदर्भ में एक प्रस्ताव लिया जाएगा और राज्य सरकार से इसे स्वीकृति प्रदान करने की अपील की जाएगी।
इसके लिए सूबे के ऊर्जा मंत्री सह स्थानीय विधायक बिजेंद्र प्रसाद यादव की भी सहायता ली जाएगी। उन्होंने शारदा सिन्हा के लिए भारत रत्न की मांग भी रखी। मौके पर डॉ. राजाराम गुप्ता, अमर कुमार चौधरी, विनय भूषण सिंह, डॉ. अमन कुमार, वरिष्ठ पत्रकार तपेश्वर मिश्र, अमरेंद्र कुमार अमर, मो. जमालुद्दीन, गगन ठाकुर और मनमन सिंह सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
विलियम्स हाईस्कूल के प्राचार्य रहे शारदा सिन्हा के पिता, यहां गुजरा किशोरावस्था
वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता सह भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य नागेंद्र नारायण ठाकुर ने कहा कि शारदा सिन्हा का निधन विशेष रूप से मैथिली संगीत की क्षति है। सुपौल के राघोपुर प्रखंड अंतर्गत हुलास में जन्मी शारदा सिन्हा के पिता स्वर्गीय सुखदेव ठाकुर सुपौल के विलियम्स स्कूल के प्राचार्य भी रहे। विलियम्स स्कूल के प्राचार्य के वर्तमान आवास में शारदा सिन्हा का किशोरवास्था बीता है। ऐसे में एक कलाकार के लिए सम्मान की बात होगी कि टाऊन हॉल और उसका रंगमंच उनके नाम से जाना जाए।
शारदा सिन्हा जैसे व्यक्तित्व के लिए यह भी काफी छोटा सम्मान होगा। सुपौल की इस बेटी को भारत रत्न मिलना ही चाहिए। वहीं, भाजपा पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ. विजयशंकर चौधरी ने कहा कि शारदा सिन्हा के व्यक्तिगत जीवन की सादगी और उनके परिवार की सादगी प्रशंसनीय रही है। उनके पिता स्वर्गीय सुखदेव ठाकुर जब विलियम्स स्कूल के प्राचार्य थे, तब उन्हें सख्त प्रशासक के रूप में जाना जाता था। बेटी की शादी के वक्त भी उन्होंने स्पष्ट शर्त रखी थी कि शारदा सिन्हा की गायिकी पर कोई रोक-टोक नहीं होगी। शारदा सिन्हा के गीतों के बिना कोई भी शुभ कार्य नहीं होता है। उन्हें भारत रत्न मिलना ही चाहिए।