सुपौल नगर परिषद की महत्वपूर्ण बैठक गुरुवार को मुख्य पार्षद राघवेंद्र झा की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में कार्यपालक पदाधिकारी देवर्षि रंजन, सिटी मैनेजर और वार्ड पार्षद सहित अन्य अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक के दौरान मुख्य रूप से प्रधानमंत्री आवास योजना, सड़क मरम्मती कार्य और होल्डिंग टैक्स में सुधार पर विस्तृत चर्चा हुई।
इसके अलावा बैठक में लगभग 30 लाख रुपये की लागत से खरीदी गई स्वीपिंग मशीन के गायब होने का मामला भी प्रमुख रूप से उठाया गया। सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि इस घोटाले में शामिल आरोपियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। चूंकि सप्लाई एजेंसी को बार-बार कहने के बावजूद उनके द्वारा नगर परिषद को स्वीपिंग मशीन उपलब्ध नहीं कराई गई है। बैठक में वार्ड पार्षद गगन ठाकुर, मनीष कुमार सिंह, राजकिशोर कामत, मिथिलेश मंडल, अजित कुमार आर्य, शंकर राम, शिव राम यादव, शिवजी कामत, कामेश्वर पासवान, लवली कुमारी, फरहाना प्रवीण, गीता सिंह और ज्योति कुमारी सहित अन्य मौजूद रहे।
प्रधानमंत्री आवास योजना के आवेदन प्रक्रिया में हुआ बदलाव
सिटी मैनेजर ने बैठक में जानकारी दी कि प्रधानमंत्री आवास योजना के आवेदन प्रक्रिया में बदलाव किए गए हैं। अब आवेदकों को जाति और आय प्रमाण पत्र के साथ ही माता-पिता का आधार कार्ड अनिवार्य रूप से देना होगा। इस पर कई पार्षदों ने नाराजगी जाहिर की। पार्षदों ने सवाल उठाया कि जिन लाभार्थियों के माता-पिता आधार कार्ड लागू होने से पहले ही दिवंगत हो गए हैं, उनका क्या होगा। सिटी मैनेजर ने बताया कि फिलहाल वर्तमान दिशा-निर्देशों के अनुसार ही प्रक्रिया चलाई जाएगी और भविष्य में सरकार से प्राप्त आदेशों के तहत कार्रवाई होगी।
सड़क मरम्मत कार्य पर चर्चा
बैठक में शहर की क्षतिग्रस्त सड़कों की स्थिति पर भी चर्चा हुई। मुख्य पार्षद ने कहा कि नई सड़क बनाने के बजाय मरम्मत कार्य पर ध्यान दिया जाएगा। क्योंकि नई सड़क बनाने में अधिक खर्च भी होगा और सड़कों की लगातार ऊंचाई होने से आमजन को परेशानी हो सकती है। उन्होंने वार्ड पार्षदों से क्षतिग्रस्त सड़कों की सूची उपलब्ध कराने का निर्देश दिया, ताकि मरम्मत कार्य जल्द शुरू किया जा सके।
होल्डिंग टैक्स को लेकर चलेगा जागरुकता अभियान
बैठक में नगर परिषद के होल्डिंग टैक्स वसूली की प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए क्यूआर कोड प्रणाली लागू करने की योजना पर चर्चा हुई। इस दौरान मुख्य पार्षद ने कहा कि टैक्स संग्रह बढ़ाने और नागरिकों को जागरुक करने के लिए तकनीकी विशेषज्ञों की नियुक्ति की जाएगी। उनके द्वारा जो भी टैक्स जमा करवाया जाएगा, उस आधार पर उन्हें कमीशन के रूप में मानदेय का भुगतान होगा।