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सहरसा में सफाई व्यवस्था बेपटरी: कूड़े के ढेर में तब्दील हुआ शहर, हड़ताल के चौथे दिन समर्थन देने पहुंचे विधायक

Mon, 05 Jan 2026 05:06 PM IST
कोसी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहरसा

सार

Saharsa News: सहरसा में सफाई कर्मियों की हड़ताल के चौथे दिन शहर में गंदगी का अंबार लग गया है। विधायक आईपी गुप्ता ने धरना स्थल पहुंचकर कर्मियों की 9 सूत्री मांगों का समर्थन किया है। संघ ने मांगें पूरी न होने तक हड़ताल जारी रखने की चेतावनी दी है।
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सफाई कर्मियों से बातचीत करते हुए विधायक इंद्रजीत प्रसाद गुप्ता - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सहरसा नगर निगम में सफाई कर्मियों की हड़ताल के चलते शहर की सूरत बिगड़ गई है। बीते चार दिनों से चल रही इस हड़ताल के कारण सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। नगर निगम के करीब साढ़े पांच सौ सफाई कर्मियों के काम बंद कर देने से शहर की सड़कों और गली-मोहल्लों में कूड़े का अंबार लग गया है। चारों तरफ फैली गंदगी और बदबू से आम नागरिकों का जीना मुहाल हो गया है, वहीं शहर में अब संक्रमण फैलने का खतरा भी मंडराने लगा है।

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धरना स्थल पर पहुंचे विधायक, मांगों को बताया जायज
सोमवार को हड़ताल के चौथे दिन स्थानीय विधायक इंद्रजीत प्रसाद गुप्ता उर्फ आईपी गुप्ता आंदोलनरत सफाई कर्मियों के बीच पहुंचे। उन्होंने धरना स्थल पर कर्मियों से बातचीत की और उनकी मांगों का समर्थन किया। विधायक ने सफाई कर्मियों की मांगों को पूरी तरह जायज बताते हुए भरोसा दिलाया कि वे इस मसले पर गंभीर हैं। विधायक ने कहा कि शहर की सफाई व्यवस्था में आपका योगदान अहम है। मैं जल्द ही नगर निगम आयुक्त, महापौर और जिला पदाधिकारी से बात कर इस समस्या का स्थायी समाधान निकालूंगा। इसके बाद विधायक ने नगर निगम कार्यालय पहुंचकर भी स्थिति का जायजा लिया।

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क्या हैं सफाई कर्मियों की मांगें?
धरना स्थल पर मौजूद सफाई कर्मी संघ के सचिव अमर कुमार मल्लिक ने बताया कि यह हड़ताल 9 सूत्रीय मांगों को लेकर की जा रही है। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, हड़ताल जारी रहेगी। उनकी प्रमुख मांगें में सफाई कर्मियों का न्यूनतम वेतन बढ़ाकर 18,000 रुपये किया जाए। पीएफ की लंबित राशि का जल्द भुगतान हो। मानदेय समय पर और नियमित रूप से मिले। कार्य सुरक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराई जाएं।

शहरवासियों की बढ़ी चिंता
हड़ताल के लंबा खिंचने से शहरवासी चिंतित हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही हड़ताल खत्म नहीं हुई, तो शहर में महामारी जैसी स्थिति बन सकती है। फिलहाल सभी की नजरें अब जिला प्रशासन और नगर निगम पर टिकी हैं कि वे कब तक सफाई कर्मियों की सुध लेते हैं और शहर को इस गंदगी से निजात दिलाते हैं।

 

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