नया बाजार में 1970 में स्थापित वैष्णवी काली मंदिर बना है आस्था का केंद्र
सहरसा शहर के डॉक्टर्स कॉलोनी के रूप में विख्यात नया बाजार में भी धूमधाम से काली पूजा का आयोजन किया जाता है। इस स्थान पर आज मां काली का मंदिर बना है। वह पहले एक निर्जन स्थल था। इस स्थान पर शवों का दाह संस्कार होता था और यह जगह किसी के भी रुकने या जाने के लिए उपयुक्त नहीं मानी जाती थी।
स्थानीय बड़े बुजुर्ग कहते हैं कि अक्सर शाम के बाद वहां पायल की आवाजें सुनाई देती थी। लोग अज्ञात भय से थर्राते हुए वहां से गुजरते थे। यह रास्ता सदर अस्पताल को भी जोड़ता है। लोग मजबूरी में वहां से गुजरते थे। लोगो ने बताया कि एक दिन इस विचित्र घटना की बात स्थानीय निवासी स्वर्गीय चंदू सिंह के कानों तक पहुंची। उनकी जिज्ञासा जागी और एक संकल्प लेकर उन्होंने उसी रात उस स्थान पर जाने का निश्चय किया। अंधेरी रात में वह हिम्मत के साथ वहां पहुंचे।
लोगों के अनुसार, जैसे ही वे उस स्थल के निकट पहुंचे। उन्हें एक रहस्यमयी अनुभूति हुई। उनके भीतर एक असामान्य ऊर्जा का प्रवाह महसूस हुआ। जो उन्हें बता रही थी कि यहा कोई दैवीय शक्ति विद्यमान है। उन्होंने समझा कि यहां कोई शक्ति अवश्य है, जो खुद को प्रकट करना चाहती है। अगले कुछ दिनों तक ध्यान और साधना करते हुए उन्होंने निर्णय लिया कि इस शक्ति का सम्मान करते हुए यहां मां काली की मूर्ति स्थापित की जानी चाहिए। अपने मन में यह विचार लेकर उन्होंने एक मंदिर की स्थापना का कार्य आरंभ कर दिया। धीरे-धीरे नया बाजार के लोग भी उनके इस निर्णय के साथ जुड़ते गए और सामूहिक प्रयास से वहां मां काली की प्रतिमा स्थापित की गई है। पहले हरेक साल प्रतिमा का निर्माण किया जाता था।
श्रद्धा में बदल गया लोगों का भय
मंदिर बनने के बाद से वह स्थान पवित्र और सुरक्षित महसूस होने लगा। लोगों में जो भय था वह श्रद्धा में बदल गया। अब उस स्थान से किसी अदृश्य शक्ति का भय नहीं, बल्कि मां काली का आशीर्वाद प्राप्त होता है। स्वर्गीय चंदू सिंह की इस श्रद्धा और साहस ने उस स्थान को भय से आस्था का स्थल बना दिया। इस वर्ष 54वें काली पूजा महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें मेला कमेटी के अध्य्क्ष हन्नी चौधरी हैं। कौशल क्रांतिकारी सचिव के रूप में अपनी सेवाए दे रहे हैं।