Waqf Law Protest: वक्फ कानून के विरोध में शनिवार को आयोजित प्रदर्शन में जिले के हजारों मुस्लिम समुदाय के लोग पटेल मैदान पहुंचे। जहां विपक्षी पार्टी के नेता और कार्यकर्ताओं के साथ जदयू नेता भी कानून का विरोध करते नजर आए।
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और इमारत ए सरिया फुलवारी शरीफ पटना के आह्वान पर वक़्फ एक्ट 2025 को लेकर सहरसा जिले के पटेल मैदान में एक दिवसीय विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया। इसमें जिले के हजारों मुस्लिम समुदाय के लोगों के साथ राजद और अन्य विपक्षी पार्टी के नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए।
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प्रदर्शन में जिले के दो हजार से अधिक मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भाग लिया। वहीं, कांग्रेस के जिलाध्यक्ष मुकेश कुमार झा, राजद जिलाध्यक्ष मो ताहिर और सीपीआई के प्रदेश महासचिव ओमप्रकाश नारायण सहित अन्य की भी मौजूदगी रही। बिहार, उड़ीसा और बंगाल के इमारत ए सरिया के जनरल सेक्रेटरी मो मुफ्ती मोहमद सईद रहमान काश्मी ने कहा कि वक़्फ बोर्ड 2025 के नए क़ानून का सभी लोग विरोध कर रहे हैं। यह क़ानून दस्तूरे हिंद के खिलाफ है। उन्होंने कहा, अगर मांग नहीं मानी जाती है तो चरणबद्ध तरीके से आंदोलन हम लोगों का जारी रहेगा। उन्होने केंद्र सरकार से इन वक़्फ क़ानून को वापस लेने की मांग रखते हुए कहा कि कानून का विरोध करने के लिए ही यह जनसैलाब आज उमड़ा है। लोग हाथों में तख्तियां लेकर वक़्फ बिल का विरोध जता रहे थे।
बेरोजगारी पर नहीं है ध्यान : अंजूम
सबसे बड़ी बात रही जो सत्ता में शामिल जनता दल यूनाइटेड के नेता भी बिल के विरोध में काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन में शामिल हुए। जदयू के पूर्व प्रदेश महासचिव मो अंजूम हुसैन ने कहा कि सरकार को इस काले कानून को वापस लेना होगा। इस कानून पर समीक्षा के बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी रोक लगा दी है। बावजूद मुस्लिम को टारगेट कर बिल लाया जा रहा है। जदयू नेता और जिला स्तर पर जदयू पार्टी के चर्चित चेहरा में से एक अंजूम हुसैन के शामिल होने की बात सभी के जुबान पर रही।
एनडीए सरकार द्वारा लाए गए इस क़ानून का विरोध करते जदयू के सक्रिय नेता सह पूर्व प्रदेश महासचिव मो अंजूम हुसैन ने कहा कि देश में मंहगाई बढ़ गई है और जनता त्राहिमाम कर रही है। उन्होंने एनडीए की सरकार में बार-बार मुसलमानों को टारगेट करके अकलियतों के खिलाफ में बिल को लाकर उसे पास किया जाता है। उन्होंने कहा कि वक़्फ बोर्ड को लेकर सुप्रीम कोर्ट रोक लगाई है और उसके बावजूद क़ानून को लागू किया जा रहा है। ऐसे में जदयू में रहने के बावजूद भी वे समाज के लिए इस कार्यक्रम में शामिल हुए हैं और वे इसका विरोध कर रहे हैं।