सुपौल के वीरपुर में 108 करोड़ की लागत से बने एशिया के दूसरे सबसे बड़े और विश्व के पांचवें फिजिकल मॉडलिंग रिसर्च सेंटर का निर्माण पूरा हो चुका है। यह पूर्वी भारत का सबसे बड़ा सेंटर होगा, जो बाढ़ की 72 घंटे पहले सूचना प्रदान करने में सक्षम होगा। शुक्रवार को चीफ इंजीनियर ई वरुण कुमार और रुड़की से आए विशेषज्ञों की उपस्थिति में मॉडल फेब्रिकेशन कार्य का शुभारंभ किया गया।
चीफ इंजीनियर ने बताया कि आज से कोसी नदी मॉडल और बराज मॉडल के ट्रे में मॉडल फेब्रिकेशन का कार्य प्रारंभ किया गया है। इस कार्य के पूरा होने के बाद फिजिकल रूप से यह समझा जा सकेगा कि कोसी नदी के दबाव का स्तर क्या है और कहां सुधार की आवश्यकता है। पहले बिहार में केवल पटना में एक मॉडल सेंटर था। जो मैथमेटिकल मॉडल के आधार पर काम करता था। लेकिन, यह नया केंद्र फिजिकल मॉडल पर आधारित होगा। बराज मॉडल ट्रे के माध्यम से यह पता लगाया जा सकेगा कि किस फाटक पर कितना दबाव है और कहां काम करने की आवश्यकता है। इस साल बाढ़ अवधि से पहले यह फिजिकल मॉडलिंग सेंटर पूरी तरह से चालू हो जाएगा।
बिहार सहित पड़ोसी राज्यों को मिलेगा लाभ, नेपाल को भी फायदा
कोसी नदी के जल प्रवाह और दबाव का फिजिकल मॉडलिंग के जरिए अध्ययन किया जाएगा। बिहार के अलावा पूर्वी और उत्तर-पूर्वी राज्यों के साथ ही पड़ोसी देशों के लिए भी लाभकारी इस केंद्र के माध्यम से कोसी नदी के जल प्रवाह और दबाव का फिजिकल मॉडलिंग के जरिए अध्ययन किया जाएगा। कोसी नदी का 1:500 स्केल पर करीब 300 मीटर लंबा प्रतिरूप तैयार किया जा रहा है। जिसमें नदी की पूरी मोर्फोलॉजी को 160 किमी तक दर्शाया जाएगा। प्रतिरूप में पुल, बैराज, स्पर, तटबंध और सहायक नदियों को भी शामिल किया जाएगा।
इस सेंटर में कोसी नदी और बैराज के प्रतिरूपों का निर्माण किया गया है। कोसी नदी प्रतिरूप यह प्रतिरूप चतरा से लेकर 160 किमी की दूरी तक कोसी नदी की वास्तविक स्थिति को दर्शाएगा। इसमें सभी पुल, बैराज, स्पर और तटबंधों को शामिल किया गया है। 20 एकड़ में फैला यह केंद्र 1471 किलोलीटर क्षमता के ओवरहेड जलाशय से जल आपूर्ति करेगा। यह सेंटर बिहार, पूर्वी और उत्तर-पूर्वी राज्यों के साथ-साथ पड़ोसी देशों के लिए भी लाभकारी होगा।
कोसी बराज पर सिल्टिंग और दवाब का होगा विस्तृत अध्ययन
चीफ इंजीनियर ने बताया कि कोसी बराज पर सिल्टिंग और दबाव के विस्तृत अध्ययन के लिए 1:80 स्केल पर बैराज प्रतिरूप तैयार किया जाएगा। इसके जरिए बैराज गेट्स के संचालन से संबंधित प्रयोग किए जाएंगे और जरूरत पड़ने पर नए ऑपरेशन चार्ट तैयार किए जाएंगे। 1:80 के अनुपात में तैयार यह मॉडल बैराज फाटकों के संचालन और सिल्टिंग समस्याओं के समाधान में उपयोगी होगा। इस केंद्र में जॉय टच लैब, कारपेन्टरी लैब, हाइड्रोलिक लैब और आईटी लैब जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं।
बाढ़ और सिल्टिंग की समस्या का होगा समाधान
यह मॉडलिंग सेंटर नदियों में बाढ़ और सिल्टिंग समस्याओं के वैज्ञानिक समाधान में सहायक होगा। बिहार में गंगा, गंडक और कोसी जैसी नदियों में मानसून के दौरान अत्यधिक डिस्चार्ज के कारण बाढ़ की समस्या उत्पन्न होती है। यह सेंटर इन समस्याओं का वैज्ञानिक समाधान प्रदान करेगा। इस परियोजना में जल संसाधन मंत्री, विभागीय प्रधान सचिव, तत्कालीन मुख्य अभियंता ई मनोज रमण का महत्वपूर्ण योगदान है। इसका प्राथमिक डिजाईन डीएचआई इंडिया द्वारा तैयार किया गया। वही निर्माण एसोसिएट साउथ एशिया प्राइवेट लिमिटेड के परामर्श के अनुसार किया जा रहा है। इस केंद्र का इंफ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह तैयार है।
मौके पर अधीक्षण अभियंता संजय कुमार, कार्यपालक अभियंता बबन पांडे, मुख्य अभियंता के प्रवैद्यिकी सचिव परवेज अख्तर, कंपनी के मॉडलर अवधेश चंद्र पांडे, ए कंपनी के डायरेक्टर राहुल कुमार और पीएमसी के डायरेक्टर निखिल कुमार, रिवर इंजीनियर धीरज कुमार, आईटी डॉ धीरज कुमार आदि मौजूद थे।