सहरसा जिले के निजी विद्यालय प्रबंधन बच्चों को शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत मुफ्त शिक्षा देने को लेकर उदासीन बना है। इसको लेकर शिक्षा विभाग ने सख्त निर्देश दिया है। विद्यालयों को ज्ञानदीप पोर्टल पर इंटेक कैपेसिटी का निर्धारण किया जाना है। अर्थात शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 अंतर्गत जिले के प्रस्वीकृति प्राप्त विद्यालय में एंट्री लेवल पर कितने छात्र और छात्राओं को शिक्षा के अधिकार अधिनियम अंतर्गत मुफ्त शिक्षा प्रदान की जाएगी का निर्धारण किया जाएगा।
लेकिन जिले में अभी तक मात्र 60 प्रतिशत प्रस्वीकृति प्राप्त विद्यालयों ने ही अपलोड किया है। संभाग प्रभारी मनीष मोहन ने बताया कि निजी विद्यालयों को निर्धारित सीटों की संख्या के 25 प्रतिशत सीटों पर आरटीई के तहत कमजोर एवं अलाभकारी वर्ग के बच्चों का कक्षा एक में नामांकन होगा। इसी संख्या के आधार पर रेंडमाइजेशन विधि के तहत सीटों का आवंटन होगा। आरटीई के तहत शैक्षणिक वर्ष 2025-26 में ऑनलाइन प्रक्रिया को लेकर विभाग काफी सख्त है।
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, प्रारंभिक शिक्षा एवं सर्व शिक्षा अभियान, सहरसा प्रकाश रंजन ने बताया कि छात्रों की पंजीयन की प्रक्रिया 26 दिसंबर 2024 से 25 जनवरी 2025 तक जारी रहेगी। दस फरवरी 2025 तक सत्यापित छात्रों का ऑनलाइन आवंटन होगा। इससे पूर्व सभी प्रस्वीकृति प्राप्त विद्यालयों को अपने विद्यालय के कक्षा एक में नामांकन हेतु सीट की इनटैक कैपेसिटी का निर्धारण ज्ञानदीप पोर्टल पर करना होगा। जिले में विभाग द्वारा प्रस्वीकृति प्राप्त निजी स्कूलों की संख्या 263 है।
निजी विद्यालयों को आरटीई के तहत उनकी पहली कक्षा में कुल छात्रों की इनटैक कैपेसिटी का 25 फीसदी अलाभकारी व कमजोर वर्ग के बच्चों का नामांकन लेना होता है, जिसके शुल्क का भुगतान विभाग द्वारा किया जाता है। लेकिन अधिकतर निजी विद्यालय आरटीई के तहत नामांकन लेने में उदासीन होते हैं। यह स्थिति विभाग को स्वीकार्य नहीं होगी। सभी प्रस्वीकृति प्राप्त निजी विद्यालय को सख्त निर्देश दिया गया है कि शीघ्र अतिशीघ्र अपने इनटैक कैपेसिटी का निर्धारण ज्ञानदीप पोर्टल पर करना सुनिश्चित करें।