प्रतिबंधित खालिस्तानी आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल का गुर्गा करणदीप यादव होली के दिन मधेपुरा के कुमारखंड थाना क्षेत्र से अपने दो साथियों के साथ गिरफ्तार किया गया है। उसके बाद मधेपुरा और सुपौल के लोग सकते में हैं। पंजाब पुलिस के अनुसार करणदीप नार्को टेरर मॉड्यूल का अहम हिस्सा था। मूल रूप से सुपौल जिले के छातापुर प्रखंड अंतर्गत भट्टाबारी वार्ड 08 निवासी करणदीप गिरफ्तारी के दो दिन पहले से कुमारखंड थाना क्षेत्र में अपने मामा के घर छिपा हुआ था। शुक्रवार को उसकी गिरफ्तारी की गई। अब जानकारी सामने आ रही है कि कुमारखंड जाने के पहले करणदीप अपने पैतृक गांव पहुंचा था। वहां वह तीन दिन और दो रात के लिए रुका था। वह गांव से यह कह कर निकला था कि वह सीधा पंजाब जाएगा।
सुपौल स्थित पैतृक गांव में करणदीप की दादी व अन्य परिजन।
चार भाइयों में दूसरा है करणदीप का पिता, कभी-कभार ही घर आता था
स्थानीय ग्रामीण बताते हैं कि गंगा प्रसाद यादव के चार पुत्र हैं। जिसमें गजेंद्र यादव, मनोज यादव, बबलु यादव और पप्पु यादव शामिल हैं। सभी भाई परिवार के भरण-पोषण के लिए बाहर रहते हैं। तीन भाइयों का अक्सर घर आना-जाना लगा रहता है और उनके परिवार के सदस्य भी गांव में ही रहते हैं। जबकि मनोज अपने गांव में मन्नू नाम से पहचाना जाता है। मनोज बीते 20 सालों से पंजाब में सपरिवार रह रहा है। परिजनों के अत्यधिक अनुरोध पर ही शादी समारोह, किसी परिजन की मृत्यु या खास कार्यक्रम में बमुश्किल एक दिन के लिए उनका घर आना होता था। अगले ही दिन वह वापस चला जाता था। ग्रामीणों का कहना है कि मन्नू यादव सीधा-साधा इंसान है। हालांकि, करणदीप के बारे में सभी अनभिज्ञता जात रहे हैं। कुछ महीने पहले गांव में उसके गलत कामों में संलिप्तता की चर्चा हुई थी, जुड़ाव नहीं रहने के कारण लोगों ने इस पर ध्यान नहीं दिया।
सुपौल स्थित पैतृक गांव में करणदीप के पिता का घर।
सुपौल स्थित पैतृक गांव में करणदीप के घर अब भी फूस का इसी तरह बना है।