सुपौल में परिवार न्यायालय ने वारंट तामिला नहीं कराने पर प्रतापगंज थाना के थानाध्यक्ष के विरुद्ध सख्त रुख अपनाया है। न्यायालय ने उनका वेतन अगले निर्देश तक रोकने का आदेश सुपौल एसपी को दिया है। यह कार्रवाई विविध वाद संख्या 13/2022 आशा देवी बनाम सुभाष कुमार यादव मामले में की गई है। दरअसल, परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश राहुल उपाध्याय ने विविध वाद संख्या 13/2022 की सुनवाई के दौरान 10 जनवरी 2025 को डिस्ट्रेस वारंट (डीबी नंबर 22) जारी किया था। लेकिन प्रतापगंज थानाध्यक्ष द्वारा अब तक इसमें तामिला नहीं कराया गया है। यह वारंट पुलिस अधीक्षक के माध्यम से प्रतापगंज थाना भेजा गया था। जिसका उद्देश्य विपक्षी से भरण-पोषण की बकाया राशि की वसूली था।
परिवादी आशा देवी के अधिवक्ता प्रिंस कुमार ने बताया कि 30 जनवरी 2025 को इस वारंट पर की गई कार्रवाई की समीक्षा होनी थी। लेकिन न्यायालय को अब तक यह जानकारी नहीं दी गई कि वारंट का पालन हुआ या नहीं। थानाध्यक्ष को पहले भी आदेश दिया गया था। बावजूद पालन नहीं होने पर न्यायालय ने निर्देश दिया कि वे 14 मई तक कोर्ट में उपस्थित होकर बताएं कि उनके खिलाफ अवमानना और कार्य में बाधा डालने पर दंड क्यों ना दिया जाए?
कोर्ट में हाजिर नहीं हुए थानाध्यक्ष, जवाब भी दाखिल नहीं किया
मामले में प्रतापगंज थानाध्यक्ष ना तो कोर्ट में हाजिर हुए और ना ही कोई जवाब दाखिल किया। प्रधान न्यायाधीश ने इसे लापरवाही मानते हुए सुपौल पुलिस अधीक्षक को आदेश दिया कि थानाध्यक्ष का वेतन तुरंत रोका जाए और उन्हें न्यायालय में पेश किया जाए। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अगर थानाध्यक्ष संतोषजनक जवाब नहीं देते हैं तो उनके खिलाफ अवमानना के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। मामले में अगली सुनवाई 14 मई 2025 को होगी। उस दिन डिस्ट्रेस वारंट की तामिला रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई की जाएगी।