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Corruption: बिहार के जिस DTO पर संयुक्त सचिव ने FIR का दिया आदेश, उसने सिस्टम पर ही उठाए सवाल; जानें मामला

Mon, 13 Jan 2025 07:53 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सुपौल

सार

Supaul News: सुपौल के वर्तमान डीटीओ पर आरोप है कि उन्होंने दरभंगा में पदस्थापना के समय एक ही नंबर के ड्राइविंग लाइसेंस अलग-अलग व्यक्तियों को जारी किए। इस मामले में परिवहन विभाग के संयुक्त सचिव ने दरभंगा डीएम को प्राथमिकी और प्रपत्र क गठित करने का आदेश दिया है।
 
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एक ही नंबर से जारी किए गए थे ड्राइविंग लाइसेंस (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सुपौल के वर्तमान डीटीओ शशि शेखरम के खिलाफ दरभंगा में प्राथमिकी दर्ज होगी। साथ ही उनके खिलाफ प्रपत्र-क गठित करने का भी आदेश परिवहन विभाग के संयुक्त सचिव ने दरभंगा डीएम को दिया है। लेकिन मामले में डीटीओ शशि शेखरम का भी पक्ष सामने आया है।

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अमर उजाला से बातचीत में डीटीओ ने कहा कि पूरा मामला ही एक दलाल के वर्चस्व को दोबारा कायम करने के लिए गढ़ा गया है। जिला परिवहन कार्यालय दरभंगा पर एक दलाल का वर्चस्व था। मेरे पदस्थापन के पूर्व ही तत्कालीन डीटीओ के खिलाफ प्राथमिकी कराई थी। डाक के माध्यम से ड्राइविंग लाइसेंस लोगों के भेजे जाते हैं। ऐसे में यह सवाल भी है कि किसी एक व्यक्ति के पास सात लाइसेंस कैसे पहुंच गए? क्या षड्यंत्र पहले से रचा जा रहा था और मुझे बलि का बकरा बनाया गया है, क्योंकि एडीएम की रिपोर्ट में इन तथ्यों का उल्लेख नहीं है।
 
डीटीओ ने कहा कि मामला पूरी तरह ओटीपी के गलत इस्तेमाल का है। ओटीपी ई-मेल और मोबाइल दोनों पर आता है। सुपौल जैसे छोटे जिले में भी अमूमन एक दिन में 150 से 200 ओटीपी का काम होता है। दरभंगा में कम से कम एक दिन में 200 से 250 ओटीपी का काम होता है। सभी के इस्तेमाल में डीटीओ सीधे तौर पर शामिल नहीं होते हैं। ऐसे में संभव है कि कोई कार्यालय कर्मी भी फर्जीवाड़े में शामिल हो, लेकिन मेरी सहभागित मान लेने से पहले यह जांच करना जरूरी था कि ओटीपी का उपयोग किस आईपी एड्रेस से हुआ है।
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बकौल शशि शेखरम, डीटीओ कार्यालय के चार सदस्यीय समिति ने ओटीपी के आईपी को ट्रैक करने का अनुरोध किया था। इसके लिए एनआईसी की सहायता ली जा सकती थी। लेकिन एनआईसी से सहयोग लेने के बजाय मुझे और अन्य कर्मियों को सीधा दोषी मान लिया गया। दो बेल्ट्रॉन कर्मियों की सेवा वापस ले ली गई। इसका मतलब यह है कि पूरी जांच के पहले ही जांच समिति ने सभी को दोषी मान लिया। अगर मेरा पक्ष लिया गया होता तो मैं विभाग और प्रशासन को हर संभव सहयोग देता। लेकिन ओटीपी के गलत इस्तेमाल को सीधा मुझसे लिंक कर मुझे दोषी मान लिया गया और कार्रवाई का आदेश भी जारी हो गया। शशि शेखरम कहते हैं कि वह पूरे प्रकरण में कहीं से भी दोषी नहीं हैं और आदेश के खिलाफ सक्षम प्राधिकार की शरण लेंगे।
 
वर्ष 2022 से जुड़ा है मामला
जानकारी के मुताबिक, मामला वर्ष 2022 से जुड़ा है जब शशि शेखरम दरभंगा में बतौर जिला परिवहन पदाधिकारी पदस्थापित थे। आरोप है कि बतौर डीटीओ पहले तो शशि शेखरम ने बिना कागजातों की जांच-पड़ताल के ही बड़ी संख्या में ड्राइविंग लाइसेंस जारी किए। वहीं, जब घोटाले की खबर सामने आई तो पूरा रिकॉर्ड भी दफ्तर से गायब करवा दिया। शशि शेखरम के खिलाफ प्राथमिकी का आदेश बीते तीन जनवरी को ही परिवहन विभाग के संयुक्त सचिव ने दरभंगा जिलाधिकारी को दिया था। उसे लेकर दरभंगा डीएम ने तत्कालीन दरभंगा डीटीओ शशि शेखरम सहित परिवहन कार्यालय के चार कर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी का आदेश दिया है।
 
प्राथमिकी और प्रपत्र क गठित करने का आदेश
संयुक्त सचिव द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि दरभंगा व्यवहार न्यायालय के अधिवक्ता राशिद खान द्वारा इस संदर्भ में परिवाद दायर किया गया था। उसके बाद अपर समाहर्ता सह जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी दरभंगा के आदेश पर गठित चार सदस्यीय समिति की रिपोर्ट में भ्रष्टाचार का मामला सामने आया। इसमें दरभंगा डीटीओ कार्यालय में ड्राइविंग लाइसेंस में नाम, जन्म तिथि, पता, पिता का नाम बैकलॉग में एंट्री के नाम पर फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस जारी किए गए थे। इसमें दरभंगा के तत्कालीन और फिलहाल सुपौल में पदस्थापित डीटीओ शशि शेखरम सहित प्रभारी लिपिक कुमार गौरव, डाटा एंट्री ऑपरेटर रूपेश कुमार और प्रोग्रामर विक्रमजीत प्रताप की संलिप्तता सामने आई है। संयुक्त सचिव ने सभी के खिलाफ प्राथमिकी का आदेश दिया है। साथ ही तत्कालीन डीटीओ शशि शेखरम और प्रभारी लिपिक कुमार गौरव के खिलाफ प्रपत्र क गठित करते हुए विभाग को उपलब्ध कराने को कहा है। वहीं, अन्य दोनों कर्मियों की सेवा बेल्ट्रॉन को वापस करने का निर्देश दिया गया है।
 
एक ही नंबर से जारी हुए अलग-अलग लाइसेंस
आरोप के अनुसार, शशि शेखरम ने दरभंगा डीटीओ कार्यालय से एक ही नंबर पर कई लाइसेंस जारी किए थे। खास बात यह थी कि लाइसेंस जारी करने में जाति, धर्म, जन्म तिथि और पिता के नाम का ख्याल भी नहीं रखा गया। एक ही नंबर से लाइसेंस बिहार, झारखंड सहित अन्य राज्यों के लोगों के नाम से बना दिए गए थे। मामला तब उजागर हुआ, जब दरभंगा व्यवहार न्यायालय के अधिवक्ता राशिद खान ने जिला लोक शिकायत निवारण केंद्र में इसकी शिकायत की। इसके बाद एडीटीओ स्नेहा अग्रवाल, एमवीआई सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी और सतीश कुमार तथा प्रोग्रामर सोनी कुमारी को जांच का जिम्मा सौंपा गया। 13 अगस्त 2024 को समिति की जांच रिपोर्ट में शशि शेखरम के फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।
 
मधुबनी में बैठ कर बनाए दरभंगा से लाइसेंस
जांच समिति की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि शशि शेखरम मधुबनी में बैठकर ही दरभंगा कार्यालय के लाइसेंस जारी कर रहे थे। एक ही लाइसेंस नंबर का इस्तेमाल कर बिहार, झारखंड और अरुणाचल प्रदेश के अलग-अलग व्यक्ति के नाम पर लाइसेंस जारी किए गए। इसमें लोगों के नाम, जन्म तिथि और पता के साथ फर्जी लाइसेंस जारी हुआ। बड़ी बात यह थी कि इन फर्जी लाइसेंसों में हिंदू व्यक्ति को मुस्लिम और मुस्लिम व्यक्ति को हिंदू बता दिया गया।

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