मधेपुरा जिले के उदाकिशुनगंज अनुमंडल पदाधिकारी शेख जियाउल हसन ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले लिया है। बिहार सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने सोमवार 21 अप्रैल को उनके वीआरएस को मंजूरी दे दी है। यह आदेश पांच जुलाई 2025 से प्रभावी होगा। इस फैसले के बाद प्रशासनिक गलियारों से लेकर आम जनता तक हर जगह चर्चा तेज हो गई है। वीआरएस की स्वीकृति मिलने के बाद अमर उजाला से विशेष बातचीत में एसडीएम शेख जियाउल हसन ने कहा कि उन्होंने निजी कारणों से यह निर्णय लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी वे सरकारी सेवा में हैं और अपने वर्तमान दायित्वों का पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निर्वहन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब तक सेवा में हूं, मैं अपनी जिम्मेदारी को पूरी तरह निभाने का प्रयास करता रहूंगा।
राजनीति में आने की चर्चा, आधिकारिक पुष्टि नहीं
उन्होंने फिलहाल राजनीति में आने की किसी भी योजना से इनकार किया है। लेकिन, क्षेत्र में अटकलों का बाजार गर्म है। बताया जा रहा है कि वह अपने गृह जिला भागलपुर के नाथनगर विधानसभा क्षेत्र से आगामी विधानसभा चुनाव लड़ सकते हैं। सूत्रों की मानें तो वे कभी-कभी ऑफिस का काम खत्म होने के बाद क्षेत्र में भी जाते हैं। शेख जियाउल हसन का प्रशासनिक अनुभव काफी रहा है। वे वर्ष 2017 से 2020 तक भी उदाकिशुनगंज के एसडीएम रह चुके हैं। इसके बाद उनका तबादला सुपौल जिले के त्रिवेणीगंज अनुमंडल में हुआ था। बाद में 2023 में वह पुनः उदाकिशुनगंज के एसडीएम बने। उदाकिशुनगंज में वह पहले बीडीओ, सीओ और सीडीपीओ जैसे पदों पर भी काम कर चुके हैं।
घुड़सवारी को लेकर चर्चा में रहते हैं एसजेड हसन
शेख जियाउल हसन की कार्यशैली उन्हें आम प्रशासनिक अधिकारियों से अलग बनाती है। विशेषकर पर्व-त्योहारों के दौरान वे दियारा क्षेत्र में घुड़सवारी करते हुए शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील करते नजर आते थे। उनकी यह शैली न आम लोगों के बीच उनकी लोकप्रियता को बढ़ाती है।हालांकि उन्होंने खुद अभी तक किसी राजनीतिक दल में शामिल होने या चुनाव लड़ने की घोषणा नहीं की है, लेकिन उनकी लोकप्रियता और प्रशासनिक अनुभव को देखते हुए राजनीतिक दलों की नजर उन पर टिकी है।
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