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Bihar News: बिहार से पलायन की कहानी! महाराष्ट्र गए 50 मजदूर, कहा- गांव में काम होता तो घर न छोड़ते

Sat, 03 Jan 2026 10:23 AM IST
कोसी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहरसा

सार

सहरसा जिले के ऐनी गांव से शुक्रवार की रात करीब 50 बेरोजगार मजदूर रोज़ी-रोटी की तलाश में महाराष्ट्र के लिए रवाना हुए। गांव में काम और आय की कमी के कारण मजदूरों को परिवार और बच्चों को छोड़कर परदेश जाना पड़ रहा है।
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सहरसा स्टेशन पर रात में ट्रेन का इंतजार करते मजदूर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सहरसा जिले में रोजगार की कमी ने ग्रामीण मजदूरों को फिर से परदेश जाने पर मजबूर कर दिया है। शुक्रवार की रात सहरसा के ऐनी गांव से करीब 50 बेरोजगार मजदूर महाराष्ट्र की ओर रोज़ी-रोटी की तलाश में रवाना हुए। सहरसा रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर ट्रेन का इंतजार करते इन मजदूरों के चेहरों पर परिवार से बिछड़ने का ग़म और पेट पालने की मजबूरी साफ झलक रही थी।
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‘गांव में न काम है, न दाम’
ऐनी गांव के वार्ड नंबर 10 निवासी अनिल यादव ने बताया कि उनके गांव से 50 मजदूर महाराष्ट्र जा रहे हैं। वहां वे बोरी उठाने जैसे कठिन परिश्रम वाले काम करेंगे। अनिल यादव ने कहा कि महाराष्ट्र में उन्हें प्रतिदिन 700 से 800 रुपये मिल जाते हैं, जबकि गांव में काम और पैसे दोनों नदारद हैं। अगर गांव में ही 500-700 रुपये रोज़ की आमदनी मिल जाए, तो कोई भी अपना घर छोड़ने पर मजबूर नहीं होता।


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5 महीने में कमाते हैं 50-60 हजार रुपये

सज्जन यादव ने बताया कि परिवार और बच्चों को छोड़कर जाना आसान नहीं होता, लेकिन बेहतर जीवन और बच्चों की परवरिश के लिए यह कड़वा निर्णय लेना पड़ता है। वे लोग ठंड और फसल के समय को देखते हुए 5-6 महीने के लिए बाहर जाते हैं। इस दौरान वे 50-60 हजार रुपये बचाकर घर लौटते हैं। सज्जन यादव का कहना है कि अगर गांव में ही 20-25 हजार रुपये महीने का कमाई का जरिया होता, तो वे कभी परदेश नहीं जाते।
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परदेश जाने वाले समूह में सचिन कुमार यादव (ऐनी वार्ड 10), सज्जन यादव, रूपेश यादव, जद्दू साह, मिथलेश यादव, पपलू सादा, दिलचन सादा, सत्यम सादा और सरबेला (वार्ड 12) के भोली शर्मा समेत कई मजदूर शामिल हैं। सभी मजदूरों ने एक स्वर में कहा कि सहरसा और कोसी क्षेत्र में बड़े उद्योग-धंधे न होने के कारण उन्हें साल-दर-साल बिहार से बाहर काम करने जाना पड़ता है।

 

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