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भ्रष्ट तंत्र का नमूना : अफसरों ने सितंबर में काम पूरा बताया, ठेकेदार ने अक्टूबर में बताया 10% काम बाकी

Sat, 14 Dec 2024 06:11 PM IST
अरविंद कुमार न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, सुपौल

सार

Bihar News : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत एक्शन में हैं और दूसरी तरफ भ्रष्ट सिस्टम मनमानी किए जा रहा है। सुपौल का यह मामला आंखें खोलने के लिए काफी है कि सिस्टम में भ्रष्टाचार कैसे घुसा हुआ है!
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विद्यापुरी वार्ड में घोटाला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सुपौल में अधिकारियों के गठजोड़ से सरकारी राजस्व में लाखों की चपत का मामला सामने आया है। मामला सुपौल शहर के बहुचर्चित विद्यापुरी मोहल्ला में नवनिर्मित मुख्य सड़क से जुड़ा हुआ है। नगर विकास और आवास विभाग की ओर से 71 लाख 10 हजार 346 रुपये की लागत से इस सड़क का निर्माण कराया गया है। निर्माण का कार्य यूं तो नवंबर महीने में पूरा हुआ। लेकिन, कागजों पर यह सड़क सितंबर महीने में ही बनकर तैयार हो चुकी थी।

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अक्तूबर महीने में निर्माण एजेंसी गोपीकृष्णा कंस्ट्रक्शन के प्रोपराइटर गोपीकृष्णा ने बकायदा सुपौल नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी को पत्र लिखा और 90 फीसदी निर्माण कार्य पूर्ण होने की जानकारी दी। साथ ही स्पष्ट किया कि निर्माण के विरुद्ध उन्हें कोई भी राशि भुगतान नहीं की गई है। पांच अक्तूबर को भेजे गए इस पत्र में कहा गया है कि टेंडर के अनुसार, 325 मीटर सड़क सह नाला निर्माण का कार्य कराया जा रहा है। लेकिन, राशि के अभाव में अब आगे का कार्य करना संभव नहीं है।

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ठेकेदार ने एकरारनामा के अनुरूप किए गए कार्याें का यथाशीघ्र भुगतान करने की मांग की। इसके उलट नगर परिषद ने ऐसी तेजी दिखाई कि ठेकेदार के आवेदन से करीब एक महीने पहले ही यानी 13 सितंबर को ही निर्माण कार्य कागजों पर पूर्ण दिखा दिया। हैरत की बात यह है कि 13 सितंबर को ही जेई सहित सहायक एवं कार्यपालक अभियंता ने भी मापी पुस्तिका पर हस्ताक्षर दर्ज करा दिए और इसी आधार पर 70 लाख 84 हजार 798 रुपये का भुगतान भी हो गया।

एक साल पूर्व निविदा, मार्च में एग्रीमेंट, छह महीने में करना था काम
विद्यापुरी में सड़क निर्माण को लेकर यूं तो कई बार निविदा निकली, लेकिन हर बार अलग-अलग कारणों की वजह से कार्य प्रारंभ नहीं हो सका। अंतत: नवंबर 2023 में पटना हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद निविदा हुई, जिसमें गोपीकृष्णा कंस्ट्रक्शन का निविदा में चयन हुआ। इसके बाद मार्च 2024 में कार्य के लिए संवेदक ने एकरारनामा किया। इसके अनुसार निर्माण एजेंसी को छह महीने के अंदर कार्य पूरा करना था। 10 सितंबर को यह मियाद पूरी हो रही थी। इसके बाद एजेंसी से टाइम एक्सटेंशन लगने पर राशि की कटौती का प्रावधान था।



यही कारण रहा कि जब अक्तूबर महीने में ठेकेदार ने राशि के कमी के कारण आगे कार्य करने में अक्षमता जताई तो अभियंताओं ने एक महीने पूर्व ही कागजों पर निर्माण कार्य को पूर्ण बता दिया। इस प्रकार जहां कार्य पूर्ण होने के बाद संवेदक को भुगतान की जाने वाली राशि में दो से ढ़ाई महीनों का एक्सटेंशन कटौती होता, वहां महज तीन दिन की कटौती की गई, जिससे सरकार को लाखों का चूना लगाया गया।

ईओ बोले- ऑफिस में आकर मिलिए, मुझे कुछ याद नहीं
इधर, सुपौल नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी देवर्षि रंजन ने मामले की जानकारी से ही इनकार किया। उन्होंने बताया कि उन्हें इस योजना से संबंधित कुछ भी याद नहीं है। फाइल देखने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। हालांकि, जब संवेदक के पत्र के बाबत सवाल किया गया तो ईओ झल्ला उठे। कहा कि किसने आवेदन दिया है, किसको दिया है, यह कैसे स्पष्ट होगा? हो सकता है कि आवेदन आपने ही लिख लिया हो। कोई रिसीविंग हो तो बताइए। मेरे पास कोई आवेदन नहीं आया है। आप ऑफिस में आकर मिलिए। यह सब बातें फोन पर नहीं होती हैं। नवंबर महीने में सड़क का निर्माण पूरा नहीं हुआ है। यह कब हुआ है, यह भी देखना पड़ेगा।
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मुख्य पार्षद ने कहा, संज्ञान में आया है मामला
वहीं, नगर परिषद के मुख्य पार्षद राघवेंद्र झा राघव ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में आया है। यह सत्य है कि नवंबर महीने में निर्माण कार्य संपन्न हुआ है। लेकिन कागज पर इसे पूर्व में ही पूर्ण करार दिए जाने की बात सामने आ रही है। इसकी जांच कराई जाएगी। अगर कुछ भी गलत हुआ है तो दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा।

डीएम बोले, जांच कराएंगे, होगी कार्रवाई
मामले में डीएम कौशल कुमार ने कहा कि फाइल पर बैकडेटिंग में अगर निर्माण कार्य को पूर्ण बता कर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया गया है तो यह गंभीर विषय है। मामले की जांच कराई जाएगी। दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
(इनपुट : केशव कुमार, सुपौल)

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