एआईएमआईएम के नेता वारिस पठान के विवादित बयान पर भाकपा नेता कन्हैया कुमार ने कहा कि उनका बयान गलत है। कन्हैया ने कहा कि धार्मिक और कट्टर होने के बीच में अंतर है।
जेएनयू के पूर्व छात्र नेता ने सीएए-एनपीआर-एनआरसी के खिलाफ राज्यव्यापी ‘जन गण मन यात्रा’ के दौरान पठान के बयान और बंगलूरू में एआईएमआईएम की एक रैली में एक युवती द्वारा ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाए जाने के संबंध में पूछे गए प्रश्नों का उत्तर देते हुए यह बात कही।
कन्हैया पर भी 2016 राजद्रोह का आरोप लगा था, जिसके बाद वह सुर्खियों में आए थे। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि किसी बलि के बकरे की आवश्यकता हमेशा होती है। चार साल पहले बलि का बकरा मैं था, जब सोशल मीडिया समेत हर जगह मुझे अपशब्द कहे जा रहे थे। अब मैं पुराना हो चुका हूं इसलिए नफरत करने के लिए नई चीजें खोज ली गई हैं।
हालांकि उन्होंने कहा कि वह धर्म के नाम पर लोगों को भड़काने की हर कोशिश का विरोध करते हैं। कुमार ने यहां संवाददाताओं से कहा कि यह समझने की आवश्यकता है कि धार्मिक होने और कट्टर होने एवं नफरत को सही ठहराने के लिए किसी की आस्था का इस्तेमाल करने के बीच अंतर है।
क्या कहा था वारिस पठान ने
एआईएमआईएम नेता और महाराष्ट्र के पूर्व विधायक वारिस पठान ने कर्नाटक के गुलबर्ग में हुई एक रैली के दौरान हिन्दू-मुसलमान का मुद्दा उठाते हुए भड़काऊ बयान दिया था। पठान ने कहा था कि वे कहते हैं कि हमने अपनी महिलाओं को सामने रखा है, अभी तो केवल शेरनियां बाहर आई हैं और आप पसीना-पसीना होने लगे हैं। तब क्या होगा जब हम सभी साथ आ जाएंगे। 15 करोड़ हैं लेकिन सौ पर भी भारी हैं, ये याद रखना। पठान ने यह बयान एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की मौजूदगी में ही दिया था।