नाराजगी का पेंच फंसा कर भाजपा के गणित को उलझाने वाले बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के मुखिया जीतनराम मांझी भाजपा से अपनी बात मनवाकर गदगद हैं। हालिया विवाद और चुनाव की संभावनाओं पर मांझी से बातचीत।
अब तो खुश हैं सीट बंटवारे के फार्मूले से?
मैं नाराज ही कब था। गठबंधन में सीट बंटवारे पर सभी दल अपनी-अपनी बात रखते हैं। मैंने भी अपनी बात रखी थी। अब आप मीडिया वालों ने इसे मेरी नाराजगी बता दिया। मैंने हमेशा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भरोसा किया है। मैं उनकी नेतृत्व क्षमता का कायल हूं और उन्हीं के कारण इस गठबंधन का हिस्सा हूं।
वे सच नहीं बताते
लोजपा और हम कई समान सीटों पर दावा जता रहे हैं, इसका निपटारा कैसे होगा?
देखिये... मैंने आपको पहले ही कहा है कि विवाद जैसी कोई बात नहीं है। जिस तरह सीटों की संख्या पर बात हुई उसी तरह एक-एक सीट पर भी बात होगी। मैंने तो पहले ही दिन से प्रधानमंत्री मोदीजी को फ्री हैंड दे दिया है। वह जो भी फैसला करेंगे, मैं उसे स्वीकार करूंगा।
जदयू कह रही है कि मांझी को उन्होंने 140 विधायकों का नेता बनाया था, मगर भाजपा ने उन्हें भिक्षुक बना दिया है। एक -एक सीट मांगनी पड़ रही है।
वे सच नहीं बताते। मुख्यमंत्री तो बना दिया, मगर दिल से एक महादलित को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठा नहीं देख सके। पूरे देश ने देखा कि नीतीश ने मेरे साथ क्या-क्या किया। मुझे यहां मोदीजी ने बहुत सम्मान दिया है। चुनाव में जदयू को पता चल जाएगा कि एक महादलित के अपमान का क्या हश्र होता है?
नीतीश चौतरफा घिर गए
आपका क्या आकलन है बिहार चुनाव के बारे में?
नीतीशजी चौतरफा घिर गए हैं। जिस कांग्रेस के खिलाफ राजनीति की, जिस लालूजी पर वर्षों हमला बोला, अब उसी के साथ खड़े हैं। देखिये, कहीं के भी चुनाव में जब किसी एक को घेरने के लिए लामबंदी होती है तो मतदाता लामबंदी करने वालों को नकारते रहे हैं।
लोकसभा चुनाव में भी ऐसा ही हुआ। मोदीजी सबके निशाने पर थे और जनता ने उन्हें हाथों हाथ लिया। बिहार में भी ठीक ऐसा ही हो रहा है।
ओवैसी बिहार में भी संभावना तलाश रहे हैं, आरोप है कि उन्हें भाजपा ने मुस्लिम मतों में बिखराव के लिए उतारा है, इस बारे में क्या कहेंगे?
लोकतंत्र में सबको चुनाव लड़ने का हक है। जनता उन्हें पसंद नहीं करेगी तो वोट नहीं मिलेगा और पसंद करेगी तो वोट मिलेगा। भाजपा या कोई भी किसी को चुनाव लड़ने से कैसे रोक सकता है।