प्रशांत किशोर (फाइल फोटो)
जदयू के कैब को समर्थन करने से निराश हूं: प्रशांत किशोर
किशोर का कहना है कि कैब को लेकर उनके निजी रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। उन्होंने 13 दिसंबर को ट्वीट कर लिखा था, 'संसद में बहुमत कायम रहा। अब न्यायपालिका से परे, भारत की आत्मा को बचाने का काम 16 गैर-भाजपा मुख्यमंत्रियों पर है क्योंकि यह ऐसे राज्य हैं जिन्हें इन कार्यों का संचालन करना है।'
इससे एक दिन पहले उन्होंने लिखा था, 'हमें बताया गया था कि नागरिकता संशोधन विधेयक, 2019 नागरिकता प्रधान करने के लिए और यह किसी से भी उसकी नागरिकता को वापस नहीं लेगा। लेकिन सच यह है कि यह नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस के साथ मिलकर सरकार के हाथ में एक हथियार दे देगा। जिससे वह धर्म के धार पर लोगों के साथ भेदभाव कर और यहां तक कि उनपर मुकदमा चला सकती है।'
किशोर ने यह भी कहा था कि वह बहुत निराश हैं कि जदयू जिसके संविधान के पहले पन्ने पर तीन बार धर्मनिरपेक्षता का शब्द है और जिसका नेतृत्व गांधीवादी विचारधारा करती है वह कैब का समर्थन कर रही है। शनिवार को किशोर ने अपना इस्तीफा देने की पेशकश की थी क्योंकि जदयू के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद आरसीपी सिंह उन्हें निशाना बना रहे थे। उन्हें नीतीश ने पार्टी के लिए कार्य करने की सलाह दी। मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद किशोर ने सिंह के साथ अपने मतभेदों को दूर कर दिया।
प्रधानमंत्री के कार्यक्रम से नीतीश ने बनाई दूरी
नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री के कार्यक्रम से दूरी बना ली। शनिवार को उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर कानपुर में राष्ट्रीय गंगा परिषद की बैठक में उनका पहुंचना तय था, उनके स्वागत के पोस्टर तक लग चुके थे लेकिन ऐन वक्त पर उन्होंने अपना कार्यक्रम रद्द कर दिया। जिसके कारण उनके स्थान पर राज्य के उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने शिरकत की। यह कार्यक्रम नमामि गंगे के बड़ी परियोजना और समीक्षा को लेकर कानपुर में आयोजित किया गया था।