बागी तेवर अपनाने वाले नेताओं पर जदयू और भाजपा ने कार्रवाई तेज कर एकजुटता का साफ संदेश दे दिया है। जदयू ने भी अपने पंद्रह बागियों को पार्टी से छह साल तक के लिए निष्कासित कर दिया है।
प्रदेश अध्यक्ष बशिष्ठ नारायण सिंह ने जिन नेताओं को दल से बाहर निकाला है, उनमें डुमरांव के मौजूदा विधायक ददन पहलवान, जगदीशपुर विधानसभा क्षेत्र से पूर्व मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा, सिकंदरा एससी क्षेत्र से पूर्व मंत्री रामेश्वर पासवान, पूर्व विधायक सुमित कुमार सिंह, पूर्व विधायक रणविजय सिंह, महिला प्रकोष्ठ की पूर्व अध्यक्ष कंचन गुप्ता, अति पिछड़ा वर्ग आयोग के पूर्व सदस्य प्रमोद सिंह चंद्रवंशी, युवा जदयू के पूर्व कोषाध्यक्ष अरुण कुमार, औरंगाबाद के पूर्व जिला संयोजक तज्जमुल खां, रोहतास के पूर्व जिलाध्यक्ष अमरेश चौधरी,जमुई के पूर्व जिलाध्यक्ष शिवशंकर चौधरी,सिंकदरा से पूर्व प्रत्याशी सिंधु पासवान, डुमराव विधानसभा सीट से करतार सिंह यादव,बरबीघा के विधानसभा प्रभारी डा राकेश रंजन और चेनारी एससी सीट के कार्यकर्ता मुंगेरी पासवान को दल से निष्कासित कर दिया गया है।
इससे पहले भाजपा ने भी बागियों पर कार्रवाई कर साफ संदेश दे दिया है कि नीतीश और भाजपा एक हैं। दूसरे चरण का नामांकन शुरू होने के बाद भी बागियों पर कार्रवाई नहीं होने से भाजपा-नीतीश की एकजुटता पर सवाल चर्चा में थे।
भाजपा ने राजेंद्र सिंह, रामेश्वर चौरसिया, उषा विद्यार्थी समेत पार्टी छोड़कर गए नेताओं को निष्कासित कर एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की है। लोजपा से नजदीकी की चर्चा से भी दूरी बना ली है।
बावजूद इसके लोजपा की ओर से भ्रम की स्थिति बरकरार है, क्योंकि वह सिर्फ मोदी और केंद्र की उपलब्धियों का राग अलाप रही है। लोजपा में गए भाजपा के पूर्व अध्यक्ष राजेंद्र सिंह समेत ज्यादातर नेताओं के फेसबुक प्रोफाइल पर अभी भी नरेंद्र मोदी की तस्वीर है। केंद्र में लोजपा अभी भी राजग का हिस्सा है।