बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार किसकी दाल गलेगी। इसका पता तो मतगणना के बाद ही चलेगा, लेकिन इतना पता चल रहा है कि दाल के सहारे महंगाई ने तमाम मुद्दों को पीछे धकेल दिया है।
एक बार फिर महंगाई बिहार चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है। जाति, आरक्षण, गोमांस एवं विकास के मुकाबले महंगाई राजनीतिक दलों के लिए पुराना हथियार है। 1952 से लेकर आज तक यही एक ऐसा मुद्दा रहा है, जिसने हर चुनाव में सत्ता को परेशान किया है।
यही वजह है कि विरोधी और सहयोगी के साथ-साथ अपने भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार पर सवाल उठाने लगे हैं। महागठबंधन ने तो ‘दाल पर चर्चा’ कार्यक्रम तक बना लिया है।