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Bihar : हथियार फेंकने के बाद चार गोलियां क्यों मारीं? पुलिस के पास नहीं है मानवाधिकार आयोग के इस सवाल का जवाब

Thu, 18 Jun 2026 10:44 PM IST
Krishan Ballabh Narayan न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

Bihar : भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में मानवाधिकार संगठन की एंट्री के बाद पुलिस की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। एक युवा जो सिस्टम को सुधारना चाहता था, उसकी इस तरह हुई मौत ने अब कई बड़े अधिकारियों को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
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एनकाउंटर मामले में मानवाधिकार आयोग की इंट्री - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भोजपुर के शाहपुर में हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर का मामला अब और गरमा गया है। पुलिस की इस कार्रवाई को अब सीधे-सीधे मानवाधिकारों का हनन और सरेआम हत्या करार दिया जा रहा है। मशहूर अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार कार्यकर्ता और वैश्विक संस्था ह्यूमन राइट्स अम्ब्रेला फाउंडेशन के फाउंडर चेयरमैन विशाल रंजन दफ्तुआर ने इस घटना पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि यह दुनिया की अब तक की सबसे विभत्स मानवाधिकार हनन की घटनाओं में से एक है।

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ह्यूमन राइट्स अम्ब्रेला फाउंडेशन के चेयरमैन विशाल दफ्तुआर ने इस घटना की तीखी निंदा करते हुए दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की मांग की है। इस मामले को लेकर वे सीधे राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखने जा रहे हैं। उनका कहना है कि पुलिस का काम जनता की रक्षा करना है, लेकिन अगर रक्षक ही भक्षक बन जाएगा, तो पूरा लोकतांत्रिक सिस्टम ही फेल हो जाएगा। मानवाधिकार आयोग का कहना है कि भरत भूषण तिवारी कोई पेशेवर अपराधी नहीं, बल्कि सिस्टम की खामियों से आक्रोशित एक तेजतर्रार युवा था। उसने कई रचनात्मक कार्यों और जनहित के मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाई थी। विशाल दफ्तुआर ने माना कि भरत की कार्यशैली में कुछ कमियां जरूर हो सकती हैं, लेकिन उसके इरादे नेक थे और वह समाज की भलाई के लिए लड़ रहा था।
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इस मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ जब ह्यूमन राइट्स अम्ब्रेला फाउंडेशन के चेयरमैन विशाल दफ्तुआर ने खुद शाहपुर थाना के थानाध्यक्ष से फोन पर बात की। बताया जा रहा है कि पुलिस के पास इस बात का कोई जवाब नहीं था कि जब भरत तिवारी ने पुलिस के आगे अपना हथियार फेंक दिया था, तो फिर उसे एक या दो नहीं... बल्कि चार-चार गोलियां क्यों मारी गईं? पुलिस की तरफ से मिला जवाब बेहद असंतोषजनक था, जो साफ इशारा करता है कि आत्मसमर्पण के बाद भी उसकी जान ली गई।
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ह्यूमन राइट्स अम्ब्रेला फाउंडेशन के चेयरमैन विशाल दफ्तुआर ने इस संबंध में लिखा है कि बिहार पुलिस के चंद लोगों की इस अमानवीयता के चलते पूरा पुलिस फोर्स बदनाम हुआ है। हमारे अंतर्राष्ट्रीय- राष्ट्रीय मिशनों के दौरान पुलिस की मुस्तैदी को भी मैंने नजदीक से देखा है। अर्धरात्रि में वापसी के दरमियान मेरी सुरक्षा हेतु संबंधित थाना क्षेत्रों की पुलिस को पूरी तरह से मुस्तैद पाया है। लेकिन भोजपुर की इस घटना के लिये दोषी पुलिसकर्मी पुलिस फोर्स के लायक नहीं हैं। चेयरमैन विशाल दफ्तुआर ने आगे कहा कि इसके पूर्व पिछले साल मोतिहारी में वाहन चेकिंग के दौरान अनुपमा यादव से दुर्व्यवहार मामले में भी मैंने पहल की थी और दोषी पुलिस कर्मियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करवाई थी। उन्होंने आगे लिखा है कि मुझे देश की पुलिस पर बेहद गर्व है। लेकिन आरा का कुकृत्य शर्म का बोध करवाते हैं। जनहित सर्वोपरि। 
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