बिहार के छपरा जिले के सिताब दियारा में जयप्रकाश नारायण की 121वीं जयंती के अवसर पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शामिल हुए। शाह और योगी ने लोकनायक जयप्रकाश नारायण की प्रतिमा का लोकार्पण किया और श्रद्धांजलि दी। अमित शाह ने बिहार के मुख्यमंत्री का नाम लिए बिना कहा कि जेपी का नाम लेकर सत्ता में पहुंचने वाले कांग्रेस की गोद में जाकर बैठ गए।
शाह ने कहा कि जेपी अपने सिद्धांतों पर अडिग रहे। कभी उन्होंने सत्ता के बारे में नहीं सोचा था। लेकिन आज पांच-पांच बार सत्ता के लिए पाला बदल रहे है। कांग्रेस पर हल्ला बोलते हुए कहा कि भ्रष्टाचार और सत्ता में नशे में धुत सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर जेपी ने आंदोलन किए थे। शाह ने कहा कि 1973 में गुजरात में कांग्रेस की सरकार थी, इस दौरान चिमन पटेल मुख्यमंत्री थे। शाह ने कहा कि इंदिरा ने सार्वजनिक रूप से सरकारों को पैसा इकट्ठा करने का काम दिया था जिसके बाद भ्रष्टाचार शुरू हुआ। जयप्रकाश ने भ्रष्टचार के खिलाफ आंदोलन किया और उस दौरान सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया। बता दें कि, भारत रत्न से सम्मानित जेपी को इंदिरा गांधी की सरकार को उखाड़ने के लिए जाना जाता है। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जो लोग जयप्रकाश व लोहिया के नाम पर राजनीति करते रहे हैं, उनकी पोल खुल चुकी है। भ्रष्टाचार की वजह से बिहार में प्रतिभाएं दम तोड़ रही हैं।
सिताब दियारा गांव में जन्मे जयप्रकाश नारायण के घर को 5 करोड़ की लागत से नवनिर्मित भवन बनाया गया है। अमित शाह ने जेपी की जयंती के अवसर पर उनके घर को राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया। राष्ट्रीय स्मारक से महज 2 से 3 फीट की दूरी पर 2018 में एनडीए सरकार में भाजपा की याद में एक स्मरण भवन और पुस्तकालय का निर्माण किया गया था। इसपर जेपी के सिद्धांतों को लेकर केंद्र और बिहार सरकार के बीच तकरार देखने को मिली। पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा राज्यसभा सांसद सुशील मोदी ने कहा कि भाजपा की याद में नीतीश कुमार ने स्मरण भवन और पुस्तकालय का निर्माण उस समय कराया जब वह बीजेपी के साथ सत्ता में थे।
20 दिनों में शाह का दूसरा दौरा
जेपी नारायण की जंयती पर अमित शाह पिछले 20 दिनों में दूसरी बाहर बिहार पहुंचे। इससे पहले 23 और 24 सितंबर को अमित शाह सीमांचल के दौरे पर गए थे।