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Holi in Bihar : कल धुरखेली के बाद आज बिहार में होली, मगर यहां तो 14 अप्रैल को होलिका दहन करेंगे

Wed, 08 Mar 2023 10:00 AM IST
कृष्ण बल्लभ नारायण न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

आज हर कोई होली के रंग से रंगा हुआ है लेकिन एक गांव ऐसा भी है जहां आज रंग का एक कतरा भी नहीं दिखता। आलम तो यह है कि इस गाँव में न तो कोई रंग खेलता और न ही किसी के घर के चूल्हे पर कड़ाही चढ़ाया जाता है। 
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होली खेलते गाँव के युवक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आज हर कोई होली के रंग से रंगा हुआ है लेकिन एक गांव ऐसा भी है जहां आज रंग का एक कतरा भी नहीं दिखता। आलम तो यह है कि इस गाँव में न तो कोई रंग खेलता और न ही किसी के घर के चूल्हे पर कड़ाही चढ़ाया जाता है। अगर किसी ने ऐसा कुछ करने की हिम्मत की तो समझिये उसके घर में आग लगना तय है। जी हाँ यह है बिहार के मुंगेर जिला अंतर्गत असरगंज का साजुआ गांव जिसे लोग सती स्थान भी कहते हैं। मुंगेर जिला में पड़ने वाला यह गांव जिला मुख्यालय से लगभग 55 किलोमीटर दूर है।
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इस गांव के लोगों के लिए होली है अभिशाप

इस गांव के लोगों के लिए होली है अभिशाप - फोटो : अमर उजाला
इस गांव के लोगों के लिए होली है अभिशाप
यह कहानी कब की है यह किसी को सही से मालूम नहीं है लेकिन सभी लोगों का बस यही कहना है कि हमारे पूर्वजों ने ऐसा देखा था। इस गाँव के प्रकाश यादव का कहना है कि साजुआ गांव में करीब 250 सालों से होली न खेलने की एक परंपरा चली आ रही है। क्यों कि यहां होली खेलना त्यौहार नहीं बल्कि एक अभिशाप है। 

यह कहानी नहीं सच्चाई है

यह कहानी नहीं सच्चाई है - फोटो : अमर उजाला
यह कहानी नहीं सच्चाई है 
प्रकाश यादव बताते हैं कि लगभग 250 वर्ष से भी पहले इसी गांव में सती देवी नाम की एक महिला के पति का होलिका दहन की रात निधन हो गया। पति की मौत के बाद सती भी अपने पति के साथ चिता पर जलकर सती होना चाहती थी जिसे समाज के लोगों ने उन्हें ऐसा करने से मना कर दिया। लेकिन पतिव्रता सती अपनी जिद पर अड़ी रही। मजबूर होकर लोगों ने उन्हें उनके घर के एक कमरे में बंद कर दिया और उसके पति के शव को अर्थी पर लादकर ले जाने लगे। 

रास्ते में होने लगा चमत्कार 

शव ले जाने के क्रम में रास्ते में होने लगा चमत्कार - फोटो : अमर उजाला
रास्ते में होने लगा चमत्कार 
ग्रामीण बताते हैं कि शव को जलाने के लिए ग्रामीणों के आगे बढते ही अर्थी पर से शव नीचे गिर गया। ग्रामीण फिर शव को उठाकर अर्थी पर रखकर ज्यों ही आगे बढ़ते तो फिर शव नीचे गिर जाता। यह एक दो बार नहीं बल्कि लगातार होने लगा। स्थिति यह हो गई कि शव को अर्थी पर लेकर एक कदम आगे बढ़ना दुस्वार हो गया। इस तरह से लोग परेशान परेशान हो गए। अंत में लोगों ने सती को कमरे से बाहर निकाला। कहा जाता है कि सती दौड़कर अपने पति के शव के पास आई और वहीं उन्होंने प्राण त्याग दिए। 
 

चिता में आग का लगना भी था चमत्कार - फोटो : अमर उजाला
चिता में आग का लगना भी था चमत्कार 
ग्रामीणों का कहना है कि सती के वहां गिरते ही उनकी मौत हो गई। फिर अचानक दोनों के शव में आग लग गई जिसमें पति पत्नी जल कर राख हो गए। ग्रामीणों का कहना है कि सती माता के कनिष्ठा से चिंगारी निकली और दोनों पति पत्नी वहीँ जलकर राख हो गए।

इस मंदिर में सती माता की बेटी की भी होती है पूजा - फोटो : अमर उजाला
मंदिर में बेटी की भी होती है पूजा 
ग्रामीणों ने उसी जगह पर सती माता का एक मंदिर बनवाया जहां सती माता,उनके पति और उनकी बेटी की पूजा की जाती है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि उनकी एक बेटी भी थी जिनको कुछ वर्ष के बाद उन्होंने अपने पास बुला लिया था और तभी से उसी मन्दिर में उनकी बेटी की भी पूजा होने लगी। सती होने के दिन से ही उन्हें देवी मानकर लोग उनकी पूजा करने लगे और उस गांव के लोगों के लिए होली हमेशा हमेशा के लिए बंद हो गया।

यहां मन्नतें होती हैं पूरी

यहां मन्नतें होती हैं पूरी - फोटो : अमर उजाला
मन्नत होती है पूरी 
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि इस मंदिर में लोग जो मन्नत मांगते हैं वह माता सती पूरा करती है। इसलिए यहाँ आसपास के क्षेत्र के लोगों की हमेशा भीड़ लगी रहती है।

इस गाँव के लोग परदेश में भी नहीं खेलते होली

इस गाँव के लोग परदेश में भी नहीं खेलते होली - फोटो : अमर उजाला
इस गाँव के लोग परदेश में भी नहीं खेलते होली 
ग्रामीणों का कहना है कि इस गाँव के लोग जो गाँव के बाहर या परदेश में जाकर रहने लगे वे लोग भी उन नियमों का पालन अब तक कर रहे हैं। इनका कहना है कि इस गांव के मूल लोग जहां भी रहते हैं, उनको इस नियम का पालन करना पड़ता है वरना उनके साथ बुरा होना तय है।
 
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इस गाँव में कब होती है होली

इस गाँव में कब होती है होली - फोटो : अमर उजाला
इस गाँव में कब होती है होली 
ग्रामीण बताते हैं कि इस गाँव में फागुन महीने में होली नहीं होती बल्कि फागुन बीत जाने के बाद अगले महीने के 14 अप्रैल को लोग होलिका दहन मनाते हैं। 
 
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