NEET : उपमुख्यमंत्री रहते सम्राट चौधरी ने कहा था कि जांच बेहतर तरीके से हो और ध्यान रहे कि इस संवेदनशील मामले में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कोताही तो ऐसी हुई कि CBI ने चार्जसीट ही दाखिल नहीं किया, मजबूरन आरोपी की बेल हो गई।
राजधानी पटना के चर्चित नीट छात्रा की मौत मामले के मुख्य आरोपी और शंभू गर्ल्स हॉस्टल के संचालक मनीष रंजन को अदालत से जमानत मिल गई है। मनीष रंजन की रिहाई से मृत छात्रा के परिजनों को बड़ा झटका लगा है। फिलहाल इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है।
भारतीय कानूनी इतिहास के लिए आज काला दिन
इस संबंध में मृतका के अधिवक्ता एस के पाण्डेय ने आज का दिन भारतीय कानूनी इतिहास के लिए काला दिन के रूप में याद किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कानूनी नियम कहता है कि आरोपी की गिरफ्तारी के 90 दिनों के भीतर अदालत में चार्जशीट यानी आरोप पत्र दाखिल करना अनिवार्य होता है। लेकिन सीबीआई ने इस मामले में सीबीआई निर्धारित समय सीमा के भीतर चार्जशीट पेश नहीं कर सकी। सीबीआई के इसी लापरवाही की वजह से आरोपी को डिफ़ॉल्ट बेल का लाभ मिला। इससे पहले फरवरी और मार्च 2026 में कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज कर दी थी, लेकिन इस बार समय सीमा खत्म होने के कारण मुख्य आरोपी और शंभू गर्ल्स हॉस्टल के संचालक मनीष रंजन को राहत मिल गई।
यह खबर भी पढ़ें-Census 2027: घर बैठे किन-किन सवालों का जवाब देकर कर सकते हैं गणना, बिहार के बाहर रहने वालों के लिए क्या नियम?
विज्ञापन
बतौर उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दिया था सख्त आदेश
उपमुख्यमंत्री रहते सम्राट चौधरी ने इस मामले को लेकर 30 जनवरी को एक बैठक की थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि इस संवेदनशील मामले में किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने एसआईटी को निर्देश देते हुए कहा था कि जांच की गति तेज कीजिए, ताकि वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर जल्द से जल्द सच्चाई सामने आ सके। उस बैठक में राज्य के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, डीजीपी विनय कुमार और पटना के आईजी सहित विशेष जांच टीम के आला अधिकारी मौजूद थे। उनके आदेश का पालन ऐसा हुआ कि सीबीआई ने आरोपी की गिरफ्तारी के 90 दिनों के भीतर अदालत में चार्जशीट यानी आरोप पत्र दाखिल नहीं किया। लिहाजा इस हालत में अदालत को मजबूरन आरोपी को बेल देना पड़ गया।
मृतका के अधिवक्ता ने सीबीआई के खिलाफ कार्रवाई की मांग की
इस संबंध में मृतका के अधिवक्ता एस के पाण्डेय ने कहा कि सीबीआई ने घोर लापरवाही ही नहीं की है, बल्कि जानबूझकर आरोपी को निकलने का रास्ता दे दिया। सीबीआई ने समय सीमा के अंदर चार्जसीट दाखिल क्यों नहीं किया? यह जानबूझ कर ऐसा किया गया है। उन्होंने कहा कि इसमें सरकार को भी आगे आना चाहिए और ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। मनीष के बेल की जानकारी मिलते ही मृतका की मां की तबीयत खराब हो गई, जिन्हें आननफानन में इलाज के लिए अस्पताल में भारती कराया गया है।