बिहार की एक पंचायत ने कुंवारी लड़कियों के मोबाइल रखने पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी है और साथ ही पकड़े जाने पर आर्थिक दंड का भी प्रावधान भी बना दिया है।
मामला पश्चिमी चंपारण के नरकटियागंज प्रखंड की सोमगढ़ पंचायत का है जहां सिरिसिया गांव में मंगलवार को एक महापंचायत लगाई गई। महापंचायत में लड़कियों के मोबाइल रखने पर पाबंदी लगाने का फैसला लिया गया।
महापंचायत के फरमान के अनुसार जिन लड़कियों की शादी नहीं हुई है या जो नाबालिग हैं, उन्हें मोबाइल रखने पर पाबंदी लगा दी जाए। उनका तर्क था कि मोबाइल से छेड़खानी की घटनाओं में वृद्धि हो रही है। उनके इस प्रस्ताव पर वहां उपस्थित ग्रामीणों ने मुहर लगा दी।
इसके साथ ही यह फैसला भी हुआ कि वह परिवार, जिसके घर की बच्ची मोबाइल रखेगी, उसे दंडित किया जाएगा।
इधर, पंचायती राज मंत्री डॉ. भीम सिंह ने इस फैसले बाद कहा कि लड़कियों को मोबाइल फोन रखने पर पंचायतों को निर्णय लेने का अधिकार नहीं है। पंचायतों को न्यायिक कार्य करने का अधिकार नहीं है। ऐसे में इस तरह के फैसले लेने की बात का कोई मतलब नहीं है।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी पिछले तीन महीने में राज्य भर की करीब दर्जन भर ग्राम पंचायतें लड़कियों और महिलाओं के मोबाइल फोन इस्तेमाल करने पर पाबंदी लगा चुकी हैं और उन्हें भड़काऊ कपड़े नहीं पहनने के लिए कहा है।
इससे पहले सीवान जिले के पचरुखी थाना क्षेत्र में तीन लड़कियों के कथित अपहरण के बाद ग्रामीणों ने लड़कियों को जींस, टी-शर्ट पहनने और मोबाइल फोन रखने पर पाबंदी लगा दी थी। फरमान नहीं मानने पर लड़कियों के अभिभावक से बतौर जुर्माना 10 हजार रुपये वसूलने का फैसला भी लिया गया।