गयाजी में आयोजित दो दिवसीय प्रबोधन कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने जनप्रतिनिधियों को जनसेवा, सुशासन और बिहार के समग्र विकास का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि चुनाव जीतना लोकतंत्र की पहली सीढ़ी है, लेकिन जनता का स्थायी विश्वास केवल सेवा और संवेदनशील नेतृत्व से ही हासिल किया जा सकता है। उन्होंने बिहार से पलायन रोकने और राज्य को रोजगार का केंद्र बनाने का आह्वान भी किया।
बिहार बने रोजगार का केंद्र, पलायन पर लगे विराम
उपराष्ट्रपति ने कहा कि बिहार का विकास ऐसा होना चाहिए कि यहां के युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में न जाना पड़े। बल्कि ऐसी परिस्थितियां बनें कि देश के अन्य हिस्सों के लोग रोजगार और अवसर की तलाश में बिहार आएं। उन्होंने कहा कि जनता ने जनप्रतिनिधियों पर विश्वास जताया है और अब उनकी जिम्मेदारी विकास के माध्यम से उस भरोसे को मजबूत करने की है।
गया की धरती से सेवा का संदेश
उन्होंने गया की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि यही वह पावन भूमि है, जहां राजकुमार सिद्धार्थ भगवान बुद्ध बने। इस धरती से जनप्रतिनिधियों को भी सेवा, करुणा और समाज के प्रति समर्पण की प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सत्ता का उद्देश्य शासन करना नहीं, बल्कि जनता की सेवा करना है।
बिहार की ऐतिहासिक भूमिका को किया याद
उपराष्ट्रपति ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर आपातकाल तक बिहार ने देश को दिशा देने का कार्य किया है। उन्होंने डॉ. राजेंद्र प्रसाद, लोकनायक जयप्रकाश नारायण और जननायक कर्पूरी ठाकुर जैसे महान नेताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि बिहार ने देश को ऐसे व्यक्तित्व दिए, जिन्होंने लोकतंत्र को नई ऊर्जा प्रदान की।
सदन में संवाद और मर्यादा पर दिया जोर
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होने के बाद सभी जनप्रतिनिधियों का लक्ष्य केवल विकास होना चाहिए। सदन की कार्यवाही बाधित करना लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है। विधायक संवाद, चर्चा और रचनात्मक बहस के जरिए जनता की समस्याओं का समाधान निकालें।
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2047 के विकसित भारत में बिहार की अहम भूमिका
उपराष्ट्रपति ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत का सपना बिहार के विकास के बिना पूरा नहीं हो सकता। उन्होंने वैशाली की लोकतांत्रिक परंपरा का उल्लेख करते हुए भारत को लोकतंत्र की जननी बताया और कहा कि बिहार की राजनीतिक चेतना आज भी पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत है।
जनसेवा ही जनप्रतिनिधि की सबसे बड़ी पहचान
अपने संबोधन के अंत में उपराष्ट्रपति ने कहा कि चुनाव मतों से जीते जाते हैं, लेकिन जनता का दिल सेवा से जीता जाता है। उन्होंने विधायकों से युवाओं के लिए अवसर सृजित करने, विकास को प्राथमिकता देने और संविधान की भावना के अनुरूप जनहित में कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रबोधन कार्यक्रम जनप्रतिनिधियों की लोकतांत्रिक समझ और विधायी क्षमता को और मजबूत करेगा।