Bihar Vidhan Sabha Chunav 2025: बिहार में विधानसभा चुनाव के लिए 6 और 11 नवंबर को मतदान होना है। चुनाव नजदीक आते ही माहौल पूरी तरह चुनावी हो गया है। इसी के तहत, अमर उजाला का चुनावी रथ ‘सत्ता का संग्राम’ गया जी पहुंचा।
गया जी की धरती पर इन दिनों सिर्फ धान की फसल नहीं लहरा रही, बल्कि लोकतंत्र भी पूरे जोश में है। मिट्टी की सोंधी खुशबू के साथ अब चुनावी हवा भी चल रही है, कहीं चौपालों पर चर्चाओं का दौर है, तो कहीं गलियों में नारों की आवाज गूंज रही है। हर कोई यही सोच रहा है कि इस बार सत्ता की चाबी किसके हाथ लगेगी? जब ‘अमर उजाला’ का चुनावी रथ सत्ता का संग्राम लेकर गया जी पहुंचा, तो लगा जैसे लोकतंत्र की सबसे जोरदार धड़कन यहीं सुनाई दे रही हो, जनता पूरी उम्मीद, बदलाव और विश्वास के साथ नई कहानी लिखने को तैयार है।
अशोक कुमार सिंह ने कहा, “गया शहर में पिछले 20 वर्षों से कोई बड़ा विकास नहीं हुआ है। इसलिए अब जनता बदलाव चाहती है।” सुरेश प्रसाद ने बताया, “गया शहर में बीजेपी अभी भी मजबूत है। यहां बीजेपी को ही जीत मिलेगी। मैं जेपी आंदोलन के समय से बीजेपी से जुड़ा हूं और इस बार भी बीजेपी को ही वोट दूंगा। मौजूदा विधायक ने भी इलाके में काम किया है। वहीं वीरेंद्र सिंह ने कहा कि हम इस बार एनडीए को समर्थन दे रहे हैं। एनडीए सरकार ने जो विकास किया है, वो सबके सामने है और आगे भी विकास का काम जारी रहेगा। यूपीए के लोग सिर्फ जाति की राजनीति करते हैं, लेकिन अब लोग विकास के मुद्दे पर वोट देंगे।
दिनेश यादव ने कहा कि अब बिहार में रावण राज नहीं रहेगा, यहां राम राज रहेगा। बिहार की महिलाएं आज सुरक्षित हैं, तो उसका श्रेय नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री मोदी को जाता है। मौजूदा विधायक इस बार करीब 50 हजार वोट से जीतेंगी। राजू कुमार ने कहा कि इस बार मोहन श्रीवास्तव के पास अच्छा मौका है। वह पिछले दो चुनाव से लगातार लड़ रहे हैं और इस बार जनता उनके साथ है।
अमित श्रीवास्तव ने कहा कि गया जी के लोग पिछले 35 साल से एक ही चेहरे को चुनते आ रहे थे, लेकिन अब लोग बदलाव के मूड में हैं। मौजूदा विधायक कहते हैं कि उन्होंने विकास किया, लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और है। इस बार गया जी में बदलाव तय है।
मोहन श्रीवास्तव ने कहा कि 2005 से पहले बिहार की हालत बहुत खराब थी। नीतीश कुमार के सत्ता में आने के बाद सड़क, बिजली और विकास के क्षेत्र में बड़ा सुधार हुआ। पहले लोग बिजली के तार पर कपड़े सुखाते थे, अब गया जी में 300 करोड़ रुपये का आधुनिक रेलवे स्टेशन बन रहा है। पर्यटन क्षेत्र में भी काफी काम हुआ है।”
राज शर्मा ने कहा, “इस बार एनडीए के पक्ष में माहौल है। हम लोग एनडीए को ही वोट देंगे। बंटू सिंह ने कहा कि हमने जंगलराज का समय देखा है। उस वक्त अगर मेरी बहन स्कूल से देर से लौटती थी तो मैं साइकिल से उसे देखने जाता था। 2005 के बाद जब नीतीश कुमार आए, तब से माहौल सुरक्षित हुआ है।”
राजनीति चर्चा
चर्चा की शुरुआत भाजपा नेता मुकेश कुमार से हुई। उन्होंने कहा कि गया जी में जीत के सभी पैमाने मौजूद हैं। यहां हमने विकास किया है और उसी विकास के आधार पर हमारे उम्मीदवार सबसे बेहतर हैं। उन्होंने बताया कि हमारा उम्मीदवार लगातार 18 घंटे काम कर रहा है, इसलिए गया की जनता उस पर विश्वास जताती रही है।
इसके बाद कैमरा राजद नेता धीरेंद्र गुप्ता की ओर मुड़ा। हल्की मुस्कान के साथ उन्होंने कहा कि आपने इनसे (भाजपा नेता से) पूछा था कि गया जी में एनडीए की ओर से बार-बार एक ही चेहरा क्यों सामने आता है, और ये विकास की बात कर रहे थे। सच तो यह है कि इनके पास कोई मुद्दा ही नहीं है। मुद्दों की बात तो हमारे नेता तेजस्वी यादव करते हैं। फर्क बस इतना है कि हम मुद्दे की बात करते हैं, और ये मुर्दे की बात करते हैं। हमारी पार्टी ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की नीति पर चलती है, जबकि इनकी राजनीति बस हिन्दू-मुस्लिम तक सीमित है। उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर कुछ नहीं हुआ है। गया शहर की हालत यह है कि यहां जाम की समस्या इतनी विकराल है कि लोग चलते नहीं, रेंगते हैं।
कांग्रेस नेता ने कहा कि यहां के मौजूदा विधायक बार-बार जीत रहे हैं, इसमें जातीय समीकरणों का भी बड़ा योगदान है। उन्होंने कहा कि गया जी की जनता ने मौजूदा विधायक को आठवीं बार विधानसभा की गद्दी पर बैठाया, लेकिन रोजगार के मुद्दे पर कोई ठोस काम नहीं हुआ। आज यहां एक भी फैक्ट्री नहीं है, हालात यह हैं कि यहां के युवाओं को रोजगार के लिए बाहर जाना पड़ता है।
वहीं जदयू नेता ने कहा कि इन 35 वर्षों में 15 साल लालू प्रसाद यादव के शासन में बीते और उसके बाद 2005 से एनडीए की सरकार बनी। जब हमने सत्ता संभाली तो बिहार की हालत एक कूड़ेदान जैसी थी। अब आप खुद सोचिए, कूड़ेदान को ताजमहल बनाने में कितना समय लगता है। विपक्ष जिन मुद्दों की बात कर रहा है—रोजगार और विकास—आप बस 2005 के बिहार और 2025 के बिहार की तुलना कर लीजिए, फर्क खुद समझ में आ जाएगा।