आरपीएफ जवान के साथ हॉस्टल से भागे तीन छात्र
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गया जंक्शन पर रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने मानव तस्करी और संभावित अनहोनी से तीन नाबालिग बच्चों को बचाते हुए सराहनीय कार्य किया है। हॉस्टल से भागकर गया पहुंचे तीनों बच्चों को ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते के तहत रेस्क्यू कर सुरक्षित रूप से चाइल्ड हेल्पलाइन के हवाले किया गया।
प्लेटफॉर्म पर अकेले बैठे मिले तीन मासूम
पूर्व मध्य रेल के डीडीयू मंडल अंतर्गत आरपीएफ पोस्ट गया को गुरुवार सुबह चाइल्ड हेल्पलाइन के केस वर्कर मकसूद आलम ने सूचना दी कि गया जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 पर मिडिल फुट ओवरब्रिज (एफओबी) के नीचे तीन नाबालिग बच्चे अकेले बैठे हुए हैं। सूचना मिलते ही सहायक उप निरीक्षक मृत्युंजय कुमार अकेला, उप निरीक्षक मोनिका कुमारी और आरक्षी ओम प्रकाश मौके पर पहुंचे।
पूछताछ में सामने आई हॉस्टल से भागने की वजह
आरपीएफ टीम ने बच्चों से बातचीत की तो पता चला कि उनकी उम्र 11 से 12 वर्ष के बीच है और वे नवादा जिले के विभिन्न गांवों के रहने वाले हैं। बच्चों ने बताया कि वे नवादा के अमीपुर स्थित एक रेसिडेंशियल स्कूल के हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करते हैं। किसी कारणवश वे गुरुवार सुबह करीब चार बजे हॉस्टल से निकल गए और ट्रेन पकड़कर गया पहुंच गए।
अनहोनी और मानव तस्करी की आशंका पर तुरंत एक्शन
बच्चों के साथ कोई अभिभावक नहीं था और वे काफी डरे-सहमे नजर आ रहे थे। ऐसे में आरपीएफ ने आशंका जताई कि वे मानव तस्करी या किसी अन्य अनहोनी का शिकार हो सकते हैं। सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए तीनों बच्चों को तत्काल रेस्क्यू कर रेलवे सुरक्षा बल पोस्ट लाया गया।
आरपीएफ ने कराया भोजन, दी सुरक्षा और भरोसा
आरपीएफ पोस्ट पर बच्चों को भोजन के लिए बिस्किट और पीने का पानी उपलब्ध कराया गया। अधिकारियों ने बच्चों को समझाया और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की। इसके बाद आगे की कानूनी और सामाजिक प्रक्रिया के लिए बच्चों को चाइल्ड हेल्पलाइन गया के केस वर्कर मकसूद आलम को सुरक्षित सुपुर्द कर दिया गया।
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बच्चों की सुरक्षा का मजबूत कवच बना ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते
रेलवे स्टेशनों पर भटके, लापता या संकट में फंसे बच्चों को सुरक्षित बचाने के लिए चलाया जा रहा ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते लगातार सफल साबित हो रहा है। गया जंक्शन पर हुई यह कार्रवाई एक बार फिर साबित करती है कि सतर्कता और समय पर हस्तक्षेप से बच्चों को बड़े खतरे से बचाया जा सकता है।