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बिहार: मोबाइल से पिंडदान! विदेश में बैठे अजय गुप्ता ने निभाया पितृ कर्म, देवघाट पर जुटी श्रद्धालुओं की भीड़

Fri, 02 Oct 2026 02:13 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गयाजी

सार

गयाजी के विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेले में ऑनलाइन पिंडदान का अनोखा मामला सामने आया है। विदेश में रह रहे अजय गुप्ता वीडियो कॉल के जरिए फल्गु नदी के देवघाट पर हुए पिंडदान से जुड़े रहे। पुरोहित ने उनके नाम और गोत्र के आधार पर प्रतिनिधि के माध्यम से पितृ कर्म की प्रक्रिया पूरी कराई।
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विदेश में बैठे अजय गुप्ता ने वीडियो कॉल के जरिए गयाजी के देवघाट पर कराया ऑनलाइन पिंडदान, कर्मका
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विस्तार
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क्या विदेश में बैठकर भी गयाजी में अपने पूर्वजों का पिंडदान कराया जा सकता है? गयाजी के विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेले में इसका एक अनोखा उदाहरण सामने आया है। विदेश में रह रहे अजय गुप्ता ने मोबाइल और वीडियो कॉल के जरिए फल्गु नदी के देवघाट पर ऑनलाइन पिंडदान कराया।

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वह पूरे कर्मकांड के दौरान वीडियो कॉल से जुड़े रहे और पुरोहितों के निर्देश के अनुसार पितृ कर्म में सहभागी बने। देवघाट पर जब मोबाइल स्क्रीन के जरिए विदेश में बैठे जजमान को पिंडदान की प्रक्रिया से जुड़ा देखा गया तो वहां मौजूद श्रद्धालुओं में भी कौतूहल पैदा हो गया। लोग यह देखने के लिए जुटे रहे कि आखिर विदेश में बैठा व्यक्ति गयाजी में अपने पूर्वजों का पिंडदान किस तरह करा रहा है।

विदेश में बैठे अजय, गयाजी में हुआ पिंडदान
अजय गुप्ता गयाजी नहीं पहुंच सके, लेकिन उन्होंने अपने पितरों के निमित्त होने वाले कर्मकांड से खुद को दूर नहीं रखा। वीडियो कॉल के जरिए वह देवघाट पर चल रहे पूरे पिंडदान से जुड़े रहे। कर्मकांड के दौरान वह मोबाइल स्क्रीन पर मौजूद रहे और धार्मिक प्रक्रिया में अपनी सहभागिता निभाते रहे। पुरोहितों के अनुसार, ऑनलाइन पिंडदान की प्रक्रिया में सबसे पहले जजमान का नाम और गोत्र लिया जाता है। इसके बाद गयाजी में मौजूद ब्राह्मण को जजमान की ओर से कर्मकांड करने का अधिकार सौंपा जाता है।

कैसे बनता है ऑनलाइन पिंडदान में प्रतिनिधि?

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पंडित अरविंद कुमार पाण्डेय के अनुसार, ऑनलाइन पिंडदान में जजमान अपने नाम और गोत्र के साथ गयाजी में मौजूद ब्राह्मण को अपना प्रतिनिधि और उत्तराधिकारी बनाते हैं। इसके बाद वही ब्राह्मण जजमान की ओर से पितरों का पिंडदान करता है। उनका कहना है कि जिस समय पिंडदान की प्रक्रिया होती है, उस दौरान जजमान का नाम और गोत्र ही कर्मकांड का आधार रहता है। जजमान की ओर से अधिकार दिए जाने के बाद गयाजी में मौजूद व्यक्ति उनके प्रतिनिधि के तौर पर पिंडदान की प्रक्रिया पूरी करता है।

वीडियो कॉल पर जुड़े रहे जजमान
पंडित अरविंद कुमार पाण्डेय बताते हैं कि ऑनलाइन पिंडदान के दौरान जजमान मोबाइल पर लगातार जुड़े रहते हैं। कर्मकांड के दौरान वे हाथ जोड़कर प्रणाम करते हैं और पूरी प्रक्रिया को वीडियो कॉल पर देखते हैं। उनके अनुसार, अजय गुप्ता भी ऑनलाइन पिंडदान के दौरान पूरे समय वीडियो कॉल से जुड़े रहे। उन्होंने बताया कि नोएडा के जजमान अजय गुप्ता का नाम और गोत्र लेकर गयाजी में एक ब्राह्मण को सौंपा गया और उन्हें जजमान का प्रतिनिधि बनाया गया। इसके बाद उसी प्रतिनिधि के माध्यम से देवघाट पर पिंडदान कराया गया।

श्रद्धा और विधि-विधान से पिंडदान पर जोर
पंडित ओम प्रकाश पांडेय के अनुसार, ऑनलाइन पिंडदान में सबसे पहले जजमान का नाम और गोत्र उच्चारित कराया जाता है। इसके बाद जजमान की ओर से अधिकार प्राप्त कर पुरोहित उनके पितरों का पिंडदान करते हैं। उनका कहना है कि कर्मकांड श्रद्धा और निर्धारित विधि-विधान के अनुसार किया जाता है। उनके मुताबिक, विदेश में मौजूद जजमान भी वीडियो कॉल के माध्यम से जुड़े रहते हैं, जबकि गयाजी में उनका प्रतिनिधि बनकर पुरोहित पिंडदान की प्रक्रिया पूरी करता है।

ऑनलाइन पिंडदान देखने उमड़ी भीड़
देवघाट पर ऑनलाइन पिंडदान का यह तरीका श्रद्धालुओं के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना रहा। मोबाइल स्क्रीन पर विदेश में बैठे जजमान को कर्मकांड से जुड़े देखकर लोग इसकी प्रक्रिया समझने की कोशिश करते नजर आए। पितृपक्ष मेले में इस तरह ऑनलाइन माध्यम से होने वाला पिंडदान यह भी दिखाता है कि विदेश या देश के दूसरे हिस्सों में रहने वाले लोग गयाजी पहुंच नहीं पाने की स्थिति में स्थानीय पुरोहितों के माध्यम से पितृ कर्म से जुड़ने का प्रयास कर रहे हैं।

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क्या विदेश में बैठकर कराया जा सकता है पिंडदान?
अजय गुप्ता के ऑनलाइन पिंडदान के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर विदेश में बैठा कोई व्यक्ति गयाजी में पिंडदान कैसे करा सकता है? पुरोहितों के मुताबिक, इसमें जजमान का नाम, गोत्र और उनकी ओर से प्रतिनिधि को दिया गया अधिकार महत्वपूर्ण होता है। जजमान वीडियो कॉल के जरिए कर्मकांड से जुड़ा रहता है, जबकि गयाजी में मौजूद प्रतिनिधि उसकी ओर से पिंडदान की प्रक्रिया पूरी करता है। यानी हजारों किलोमीटर दूर रहने के बावजूद अजय गुप्ता ने मोबाइल की स्क्रीन के जरिए गयाजी के देवघाट से खुद को जोड़ा और अपने पूर्वजों के निमित्त पितृ कर्म कराया।

विदेश में बैठे अजय गुप्ता ने वीडियो कॉल के जरिए गयाजी के देवघाट पर कराया ऑनलाइन पिंडदान, कर्मका

 

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