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नेपाल की तबाही से गयाजी के पुरोहित परेशान: पितृपक्ष मेले पर पड़ेगा असर; घट सकते हैं हजारों नेपाली श्रद्धालु

Mon, 31 Aug 2026 04:56 PM IST
मगध ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गयाजी

सार

Bihar News: नेपाल में आई भीषण बाढ़ और तबाही का असर गयाजी के पितृपक्ष मेले पर पड़ने की आशंका है। हर साल 40 से 50 हजार नेपाली श्रद्धालु पिंडदान के लिए पहुंचते हैं, लेकिन इस बार करीब 25 प्रतिशत परिवार यात्रा टाल सकते हैं। इससे पंडा समाज और स्थानीय कारोबारियों की चिंता बढ़ गई है।
 
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नेपाल की बाढ़ से प्रभावित होगा गया जी का पितृपक्ष मेला कारोबार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला गयाजी में 26 सितंबर 2026 को पूर्णिमा श्राद्ध के साथ शुभारंभ हो जाएगा। मेले का समापन 10 अक्टूबर 2026 को अमावस्या के दिन होगा। जिला प्रशासन के साथ-साथ गेवाल पंडा और स्थानीय कारोबारी मेले की तैयारियों में जुटे हुए हैं। वहीं, नेपाल में आई भीषण बाढ़ और तबाही का असर गयाजी के पितृपक्ष मेले पर भी पड़ सकता है। हर साल बड़ी संख्या में आने वाले नेपाली श्रद्धालुओं की तादाद इस बार काफी कम रहने की संभावना जताई जा रही है। पंडा समाज और स्थानीय दुकानदारों की भी चिंता बढ़ गई है, क्योंकि इससे करोड़ों रुपये के कारोबार पर असर पड़ सकता है।
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नेपाल की त्रासदी से गयाजी में बढ़ी चिंता
नेपाल में आई बाढ़ ने हजारों परिवारों की जिंदगी अस्त-व्यस्त कर दी है। ऐसे हालात में लोगों की पहली प्राथमिकता अपने घर और परिवार को संभालना है। यही वजह है कि इस बार पितृपक्ष मेले में नेपाल से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या कम रहने की संभावना है। हर साल गयाजी में पिंडदान के लिए नेपाल से करीब 50 हजार श्रद्धालु पहुंचते हैं। लेकिन इस बार हालात अलग हैं। पितृपक्ष मेले के दौरान पिछले साल की तुलना में कम संख्या में नेपाली श्रद्धालुओं के आने की आशंका है।

नेपाली श्रद्धालु घटे तो दुकानदारों का कारोबार होगा प्रभावित
गयाजी शहर के नेपाली धर्मशाला के आसपास फूल-माला, कपड़ा, पूजन सामग्री और मिठाई की दुकानों का बड़ा कारोबार पितृपक्ष मेले पर टिका रहता है। नेपाली श्रद्धालुओं की संख्या कम हुई तो सबसे ज्यादा असर इन्हीं लोगों पर पड़ेगा। कारोबारियों का कहना है कि इस वर्ष पितृपक्ष मेले के दौरान नेपाली श्रद्धालुओं की संख्या कम रही तो कारोबार में बड़ी गिरावट आ सकती है।
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पंडा समाज को भी सता रही श्रद्धालुओं की कमी की चिंता
गयाजी के पंडा समाज के नेपाली पुरोहित राम कुमार ओझा बताते हैं कि नेपाल से हर साल हजारों परिवार पिंडदान के लिए आते हैं। आठ से दस जगहों पर नेपाली श्रद्धालुओं के लिए तैयारी पूरी कर ली गई है। लेकिन इस बार नेपाल के हालात को देखते हुए लोगों का आना मुश्किल लग रहा है। उनका कहना है कि अगर श्रद्धालुओं की संख्या घटी तो धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ेगा।

उन्होंने बताया कि पितृपक्ष मेले के दौरान नेपाल से भारी संख्या में श्रद्धालु गयाजी पहुंचते हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे परिवारों की होती है, जो हर साल अपने पूर्वजों का पिंडदान करने आते हैं। इस बार बाढ़ और आर्थिक नुकसान की वजह से 25 प्रतिशत परिवार अपनी यात्रा टाल सकते हैं। नेपाल के विभिन्न हिस्सों से नेपाली श्रद्धालुओं के आने की संभावना है।

पहाड़ी इलाकों में आफत, श्रद्धालुओं ने सुनाई तबाही की कहानी
नेपाल से आए श्रद्धालु राजकुमार ने बताया कि वे गया जी में पिंडदान करने के लिए आए थे। नेपाल और तिब्बत के समीप तबाही मची है। पहाड़ी इलाके के रसुवा जिले में अधिक लोगों की मौत हुई है। वहीं, बिगु राय ने बताया कि उनके इलाके में स्थिति ठीक है, लेकिन पहाड़ी इलाकों में ज्यादा तबाही मची है। रसुवा समेत तीन जिलों पर असर पड़ा है। वहां की स्थिति काफी गंभीर है। जहां उनके रिश्तेदार रहते हैं, वहां से कोई ऐसी सूचना नहीं मिली है। उन्हें सूचना मिली है कि बाढ़ आई है और लोगों को सतर्क रहने के लिए कहा गया है।


नेपाली श्रद्धालु ने बताया कि वे नेपाल से पूर्वजों के लिए गयाजी में पिंडदान करने आए हैं। गयाजी में ही उन्हें पता चला कि नेपाल में बाढ़ आ गई है। उन्होंने बताया कि काफी संख्या में नेपाली लोग बह गए। बिहार की नदियों में भी बाढ़ आ गई। उन्होंने कहा कि उन्होंने तबाही को देखा नहीं है, लेकिन इसके बारे में सुना है। चार-पांच जिलों में मकान और परिवार भी बह गए हैं। वहां तबाही मची हुई है, हालांकि उनके इलाके में फिलहाल कोई दिक्कत नहीं है।
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