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Bihar: दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष, फिर भी बिहार में पहला स्थान; महादलित परिवार की बेटी ने किया कमाल

Sun, 14 Jun 2026 01:36 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजालात, गयाजी

सार

Gayaji: गया जिले के गोइनिया गांव की महादलित छात्रा ममता कुमारी ने पैरामेडिकल प्रवेश परीक्षा में अनुसूचित जाति वर्ग में बिहार में पहला स्थान और सामान्य वर्ग में आठवां रैंक हासिल किया है।  
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टाॅपर ममता कुमारी को मिठाई खिलाते गया सांसद प्रतिनिधि - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जिस घर में कई बार पढ़ाई से पहले दो वक्त की रोटी की चिंता होती थी, उसी घर की बेटी ने पूरे बिहार में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा दिया। गया जिले के टनकुप्पा प्रखंड के गोइनिया गांव की ममता कुमारी ने पैरामेडिकल प्रवेश परीक्षा में अनुसूचित जाति वर्ग में बिहार टॉपर बनकर यह साबित कर दिया कि सपनों की उड़ान के लिए संसाधन नहीं, बल्कि हौसले की जरूरत होती है।

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अभावों के बीच गढ़ी गई सफलता की इबारत
गया जिले के टनकुप्पा प्रखंड के गोइनिया गांव की रहने वाली ममता कुमारी एक बेहद गरीब महादलित परिवार से आती हैं। भुइयां-मुसहर समाज से संबंध रखने वाली ममता के परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं थी कि उन्हें बेहतर सुविधाएं मिल पातीं, लेकिन उन्होंने परिस्थितियों को कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। लगातार मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के बल पर उन्होंने पैरामेडिकल प्रवेश परीक्षा में बड़ी सफलता हासिल की।

बिहार टॉपर बनकर बढ़ाया जिले का मान
ममता ने पैरामेडिकल प्रवेश परीक्षा में अनुसूचित जाति वर्ग में पूरे बिहार में पहला स्थान प्राप्त किया है। वहीं सामान्य वर्ग की मेरिट सूची में भी आठवां रैंक हासिल कर उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। उनकी इस उपलब्धि से न केवल परिवार, बल्कि पूरा गांव और जिला गौरवान्वित महसूस कर रहा है।
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वीडियो कॉल पर मिली केंद्रीय मंत्री की शाबाशी
ममता की सफलता की खबर पूर्व मुख्यमंत्री एवं केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी तक पहुंची तो उन्होंने वीडियो कॉल कर सीधे उनसे बातचीत की। इस दौरान उन्होंने ममता को बधाई देते हुए कहा कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और उसके प्रति समर्पण हो, तो अभाव भी सफलता के रास्ते में बाधा नहीं बन सकता। उन्होंने भविष्य में किसी भी आर्थिक परेशानी की स्थिति में हरसंभव सहायता का भरोसा भी दिया।

आठ साल तक नि:शुल्क पढ़ाने वाले शिक्षक बने संबल
ममता की सफलता के पीछे उनके शिक्षक चंदन कुमार की महत्वपूर्ण भूमिका रही। बादिल बीघा निवासी शिक्षक चंदन कुमार पिछले आठ वर्षों से उन्हें नि:शुल्क शिक्षा दे रहे थे। उन्होंने न केवल पढ़ाई में मार्गदर्शन किया, बल्कि कठिन समय में ममता का मनोबल भी बढ़ाया। उनकी मेहनत और ममता की लगन ने मिलकर यह सफलता लिखी।

गांव पहुंचकर किया गया सम्मानित
सफलता की खबर मिलते ही सांसद प्रतिनिधि नंदलाल मांझी गोइनिया गांव पहुंचे। उन्होंने ममता को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया, मिठाई खिलाकर शुभकामनाएं दीं और आगे की पढ़ाई के लिए आर्थिक सहयोग भी प्रदान किया। उन्होंने कहा कि ममता जैसी प्रतिभाएं समाज की अमूल्य धरोहर हैं, जिन्हें आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी पूरे समाज की है।

संघर्ष से सफलता तक बनी प्रेरणा की मिसाल
ममता के पिता सुरेंद्र मांझी बेहद साधारण आर्थिक स्थिति में परिवार का पालन-पोषण करते हैं। तमाम आर्थिक चुनौतियों और संसाधनों की कमी के बावजूद ममता ने अपने सपनों का साथ नहीं छोड़ा। आज उनकी सफलता उन हजारों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बन गई है, जो अभावों के कारण अपने सपनों को छोटा मान लेते हैं।

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पूरे बिहार की बेटियों के लिए बनी प्रेरणा
ममता कुमारी की यह उपलब्धि सिर्फ एक परीक्षा में सफलता नहीं, बल्कि यह संदेश है कि मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के दम पर किसी भी मंजिल को हासिल किया जा सकता है। गोइनिया गांव की यह बेटी आज पूरे बिहार के लिए प्रेरणा का प्रतीक बन चुकी है।

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