बोधगया प्रखंड के अमर बीघा गांव में सरकार द्वारा महादलित परिवारों को आवंटित परवाना जमीन को लेकर विवाद गहरा गया है। दर्जनों परिवारों ने आरोप लगाया है कि प्रभावशाली लोग उनकी सरकारी आवंटित जमीन पर कब्जा कर मकान बनाने से रोक रहे हैं। पीड़ितों का यह भी आरोप है कि विरोध करने पर उन्हें जान से मारने की धमकी दी जा रही है। वहीं, प्रशासन ने शिकायत मिलने पर जांच और नियमानुसार कार्रवाई का भरोसा दिया है।
'कागज हमारे, कब्जा किसी और का'
अमर बीघा गांव के महादलित परिवारों का कहना है कि सरकार ने उन्हें आवास निर्माण के लिए परवाना जमीन आवंटित की थी। उनके पास जमीन से संबंधित सभी वैध दस्तावेज और रसीदें मौजूद हैं, लेकिन इसके बावजूद वे अपनी ही जमीन पर मकान नहीं बना पा रहे हैं। उनका आरोप है कि कुछ लोग जबरन कब्जा कर निर्माण कार्य रुकवा देते हैं।
धमकी और अवैध कब्जे का आरोप
महादलित परिवारों ने गांव के कुछ लोगों पर सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करने और उसे बेचने की कोशिश का आरोप लगाया है। कारू मांझी, देवनाथ मांझी, रुकीनिया देवी और चिंता देवी समेत कई ग्रामीणों का कहना है कि विरोध करने पर उन्हें डराया-धमकाया जाता है। उनका आरोप है कि हथियार दिखाकर गांव छोड़ने की धमकी भी दी जाती है, जिससे पूरा परिवार भय के माहौल में जी रहा है।
घर भी नहीं बन रहा, रोजगार भी प्रभावित
महिलाओं का आरोप है कि दबाव के कारण वे न तो अपनी जमीन पर मकान बना पा रही हैं और न ही गांव में मजदूरी कर पा रही हैं। चिंता देवी ने बताया कि परिवार की आजीविका प्रभावित हो गई है और अब रहने के साथ-साथ रोजी-रोटी का भी संकट खड़ा हो गया है।
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी से लगाई गुहार
पीड़ित परिवारों ने बताया कि उन्होंने अपनी शिकायत केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी को भी लिखित रूप से सौंपी है। उनकी मांग है कि सरकार उन्हें उनकी आवंटित जमीन पर कब्जा दिलाए, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करे और परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करे।
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'शिकायत मिलेगी तो जांच करेंगे'
बोधगया के सीओ ने कहा कि मामला अभी उनके संज्ञान में नहीं आया है। यदि लिखित शिकायत मिलती है तो जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा या उसकी बिक्री कानूनन संभव नहीं है। जांच में दोषी पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।