देवी-देवताओं के विवादों के बीच महाबोधि मंदिर आपसी सौहार्द का प्रतीक बन गया है। महाबोधि मंदिर में भगवान शिव का शिवलिंग प्रचीन काल से स्थापित है। भगवान बुद्ध के साथ-साथ भगवान शिव के शिवलिंग की पूजा प्रतिदिन सुबह-शाम महाबोधि मंदिर के पुजारी के द्वारा की जाता है।
मालूम हो कि जब महाबोधि मंदिर का खुदाई हो रही थी। उस दौरान भगवान शिव का शिवलिंग सामने आया था। खुदाई के क्रम ऊपर का भाग खुदाई के समय खंडित हो गया था। तब से आज तक यह शिवलिंग महाबोधि मंदिर के गर्भ गृह में है। जैसे भगवान बुद्ध की पूजा अर्चना होता है, ठीक उसी तरह भगवान शिव के शिवलिंग की पूजा महाबोधि मंदिर के पुजारी के द्वारा किया जाता है।
बौद्ध धर्म मानने वाले लोगों के लिए महाबोधि मंदिर बहुत बड़ा महत्व है। वहीं हिन्दू धर्मालंबी भी महाबोधि मंदिर में पूजा अर्चना करने जाते है। पितृपक्ष मेला के दौरान महाबोधि मंदिर में पिंडदान करते है तथा सावन के महीने में कांवरिया लोग भी महाबोधि मंदिर में भगवान शिव और भगवान बुद्ध का दर्शन करने जाते है।
बौद्ध व हिन्दूओं के लिए है यह खास स्थल
वहीं बोधगया मंदिर प्रबन्धकारिणी समिति के सदस्य अरविंद सिंह ने बताया कि महाबोधि मंदिर बोधगया में स्थित है। महाबोधि मंदिर भगवान बुद्ध की ज्ञान स्थली है। यह मंदिर सभी धर्म के लोगों के लिए प्रिय है। खासकर बौद्ध और हिन्दू धर्म के लोग प्रतिदिन पूजा अर्चना करते है। महाबोधि मंदिर के गर्भगृह के अंदर बहुत प्राचीन शिवलिंग भी स्थापित है, जो भगवान बुद्ध के प्रतिमा के सामने अवस्थित है। वहां प्रतिदिन भगवान बुद्ध और भोलेनाथ के शिवलिंग की भी पूजा होती है।
महाबोधि मंदिर के गर्भगृह के बाहर एक मंदिर है, जहां पर पांच पांडव का भी मंदिर है। उस मंदिर में बौद्ध धर्म के लोग भी जाते है। हिन्दू धर्म के लोग भी जाते हैं और पूजा अर्चना करते हैं। इसलिए तो महाबोधि मंदिर को देखने के लिए चार बौद्ध और चार हिन्दू धर्म के लोग मंदिर प्रबन्धकारिणी समिति में सदस्य है।
शंकराचार्य द्वारा स्थापित है यह मंदिर
वहीं बोधगया में स्थित शंकराचार्य मठ के विवेकानंद आचार्य ने बताया कि महाबोधि मंदिर में जो शिवलिंग स्थापित है। यह विषय बहुत प्राचीन है। इसको समझने के लिए आपको बोधगया का इतिहास के बारे में जानने की बहुत जरुरी है। अभी जो आप जिस मठ में बैठे है, वह आठवीं सदी में शंकराचार्य के द्वारा स्थापित किया हुआ मठ है।
उसी समय से बुद्ध के साथ-साथ भगवान विष्णु और भगवान शंकर की उपासना होती है। सनातन धर्मावलंबियों का विश्वास भगवान बुद्ध, भगवान विष्णु और भगवान शिव में अंतर नहीं रखते है। भगवान बुद्ध जो है, वह भगवान विष्णु के ही नौंवे अवतार है। आप जिस विवाद के विषय में बातचीत कर रहे है। यह विवाद वह लोग करते है, जो धर्म और सांस्कृतिक के नाम पर राजनैतिक लाभ लेने वाले लोग है।
हिन्दू धर्म के अनुयाइयों भी करने आते है पूजा अर्चना
वहीं बोधगया मंदिर प्रबन्धकारिणी समिति के सचिव स्वेता महारथी ने बताया कि महाबोधि महाविहार मंदिर जो है, वह विश्व में प्रसिद्ध है। वह आज से नहीं 2600 साल से पहले से प्रसिद्ध है। यह स्थान ज्ञान स्थली के रूप में प्रसिद्ध रहा है। क्योंकि यहां पर भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। आज जो मंदिर हमलोग देख रहे हैं, उसका स्वरूप तैयार हुआ है। विश्व भर में जो भगवान बुद्ध की वाणी का प्रसार हुआ है। विभिन्न देशों में अब उसी विश्वास की धारा अब वापस आ रही है। यह मंदिर बौद्ध धर्म के लोगों के लिए नहीं बल्कि हर धर्म के लोग महाबोधि मंदिर में आते है। इस मंदिर में हिन्दू धर्म के अनुयाई भी आते है। ईसाई धर्म के अनुयाई भी आते है।
इस मंदिर में सभी धर्म के लोग आते है। पितृपक्ष मेला के दौरान इस मंदिर में पिंडदान करने के लिए देश-विदेश से भी लोग आते है। महाबोधि मंदिर में पिंडदान करते है। उसकी व्यवस्था बोधगया मंदिर प्रबन्धकारिणी समिति के द्वारा किया जाता है। वहीं सावन में कांवरिया लोग भी मंदिर में भगवान का दर्शन करने के लिए आते हैं।