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बिहार में बड़ी लापरवाही: जिस शव को परिजनों को सौंपा, वह किसी और का निकला; तब तक 90% जल चुका था शव

Sat, 19 Sep 2026 09:35 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गया जी

सार

गया के गुरारू में सड़क हादसे में मृत बिगन रविदास का पोस्टमार्टम के बाद शव बदल गया। लावारिस समझकर दूसरे शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। परिजन पहुंचे तो शव 90 प्रतिशत जल चुका था। सीओ ने चार लाख रुपये सहायता दी, जांच के आदेश दिए।

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परिजन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जिले में पोस्टमार्टम हाउस की बड़ी लापरवाही सामने आई है। सड़क हादसे में जान गंवाने वाले एक ग्रामीण का पोस्टमार्टम के बाद शव बदल गया और उसे लावारिस समझकर अंतिम संस्कार के लिए भेज दिया गया। जब परिजन शवदाह गृह पहुंचे, तब तक शव का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा जल चुका था। इस वजह से परिवार मृतक के अंतिम दर्शन तक नहीं कर सका। घटना के बाद गांव में आक्रोश है।

पोस्टमार्टम के बाद बदल गया शव

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मामला गुरारू थाना क्षेत्र के बरमा गांव निवासी 60 वर्षीय बिगन रविदास का है। शुक्रवार शाम स्टेट हाईवे-69 पर गुरारू-मथुरापुर मार्ग में अज्ञात वाहन की टक्कर से वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इलाज के लिए उन्हें मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल लाया गया, जहां रात में उनकी मौत हो गई। शनिवार को पोस्टमार्टम के दौरान हुई लापरवाही के कारण परिवार को गहरे सदमे से गुजरना पड़ा।

कागजी प्रक्रिया के दौरान हुई चूक
मृतक के भतीजे राजा दास ने बताया कि पोस्टमार्टम हाउस में उस समय तीन शव रखे थे, जिनमें एक लावारिस शव था। कागजी प्रक्रिया पूरी करने के लिए उन्हें कुछ देर के लिए बाहर भेज दिया गया। लौटने पर बताया गया कि लावारिस शव को अंतिम संस्कार के लिए भेज दिया गया है।

इसके बाद जब उन्हें दूसरा शव सौंपा गया तो शरीर का आकार और वजन देखकर उन्हें शक हुआ। चेहरा देखने पर पता चला कि यह बिगन रविदास का शव नहीं था। वहां मौजूद लोगों ने भी इसकी पुष्टि की कि शव बदल गया है।

शवदाह गृह पहुंचे तो 90 प्रतिशत जल चुका था शव

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शव की सही पहचान होने में करीब डेढ़ घंटे लग गए। इसके बाद परिजन शवदाह गृह पहुंचे, लेकिन तब तक बिगन रविदास के शव का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा जल चुका था। शरीर के कुछ हिस्से ही शेष बचे थे। परिजनों ने तत्काल मगध मेडिकल थाना पुलिस को इसकी सूचना दी। घटना के बाद अस्पताल की कार्यप्रणाली और शवों की पहचान की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

पति का अंतिम दर्शन भी नहीं कर सकी पत्नी
घटना की जानकारी मिलते ही मृतक की पत्नी शिवरती देवी और परिवार की महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। शिवरती देवी ने कहा, “दुर्घटना में एक तो हमर परिवार चल गेलथुन, आउर आखिर में उनकर मुंहियो न देख सकली। अंतिम दरसन करे के मौका तक न मिलल। उनकी पीड़ा से वहां मौजूद लोग भी भावुक हो गए। गांव के लोगों ने इस लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

सीओ ने दिया चार लाख रुपये का मुआवजा, जांच के आदेश
घटना की गंभीरता को देखते हुए गुरारू के अंचलाधिकारी तरुण कुमार रंजन मृतक के घर पहुंचे। उन्होंने परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया और सरकारी प्रावधान के तहत मृतक की पत्नी को चार लाख रुपये का सहायता चेक सौंपा। वहीं, अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज की प्राचार्या डॉ. हेमलता शुक्ला द्विवेदी ने कहा कि पूरे मामले की जांच कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। घटना ने सरकारी अस्पतालों में शव प्रबंधन और पहचान की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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