बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की सरगर्मी के बीच बुधवार को गया जिले के शेरघाटी विधानसभा क्षेत्र की ज्वलंत समस्याओं को लेकर अमर उजाला द्वारा 'सत्ता का संग्राम' कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में बीजेपी, जेडीयू, कांग्रेस और राजद के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, लेकिन स्थानीय विधायक मंजू अग्रवाल सवालों का सामना करने से कतराते हुए कार्यक्रम से दूर रहीं। उनकी गैरहाजिरी को राजनीतिक गलियारों में सवालों से बचने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
शेरघाटी को जिला बनाने पर गरमाई बहस
अंडरपास का मुद्दा बना आम लोगों की परेशानी का कारण
शेरघाटी के नई बाजार के पास जीटी रोड स्थित अंडरपास को बंद किए जाने के सवाल पर सभी दलों की घेराबंदी हुई। राजद नेता वीरेंद्र गोप ने आरोप लगाया कि कुछ रसूखदार लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए अंडरपास बंद किया गया, जिससे आमजन को परेशानी हो रही है। इसके जवाब में भाजपा और जेडीयू के नेताओं ने कहा कि स्थानीय लोग लंबे समय से अंडरपास बंद करने की मांग कर रहे थे। यहां असामाजिक तत्वों का जमावड़ा होता था और अप्रिय घटनाएं सामने आती थीं। यह फैसला सड़क निर्माण विभाग का है, जो जनहित को ध्यान में रखकर लिया गया है।
शिक्षा व्यवस्था पर भी मचा घमासान
शिक्षकों द्वारा प्राइवेट कोचिंग चलाने और सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक गिरावट के सवाल पर राजद नेता ने सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा, "शेरघाटी के कई सरकारी स्कूलों के शिक्षक निजी कोचिंग चला रहे हैं और शिक्षा विभाग मूकदर्शक बना हुआ है। एनडीए नेताओं ने पलटवार करते हुए कहा, "बिहार में शिक्षा सुधार की दिशा में काम हो रहा है। पूर्ववर्ती सरकार में तो चरवाहा विद्यालय जैसी योजनाएं चलाई गईं, जो शिक्षा के साथ मजाक था।"
पुस्तकालय निर्माण पर सभी चुप