भगदड़ में मृत श्रद्धालुओं की आत्मा की शांति के लिए गया में किया गया हवन
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गया जिले के प्रसिद्ध फल्गु नदी के किनारे स्थित सीताकुंड में शुक्रवार को महाकुंभ के दौरान भगदड़ में मारे गए श्रद्धालुओं की आत्मा की शांति के लिए हवन कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह हवन विभिन्न राजनीतिक दलों, समाजसेवियों और कार्यकर्ताओं द्वारा किया गया। इसमें महाकुंभ में हुई श्रद्धालुओं की मौत के प्रति शोक व्यक्त किया गया और उनकी आत्मा की शांति की प्रार्थना की गई।
महाकुंभ में हुई भगदड़ की घटनाओं पर उठे सवाल
गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों में प्रयागराज के महाकुंभ मेले में भगदड़ के कारण कई श्रद्धालुओं की जान चली गई थी। इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कार्यक्रम में शामिल लोगों ने यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से घटना के जिम्मेदारों की पहचान कर कठोर कार्रवाई की मांग की। लोगों ने यह भी कहा कि महाकुंभ जैसा बड़ा आयोजन श्रद्धालुओं से भरा होता है और इस प्रकार की दुर्घटनाएं कभी-कभी होती रहती हैं। बावजूद इसके, भगदड़ जैसी घटनाओं की जिम्मेदारी तय करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए उपायों की आवश्यकता है।
हवन स्थल का ऐतिहासिक महत्व
हवन कार्यक्रम फल्गु नदी के तट पर स्थित सीता कुंड में आयोजित किया गया। यह वही स्थल है जहां भगवान श्री राम और माता सीता ने अपने पिता राजा दशरथ को मोक्ष दिलाने के लिए बालू का पिंडदान किया था। कार्यक्रम में शामिल हुए मनीष कश्यप ने बताया कि महाकुंभ में हुई इस दुखद घटना के बाद श्रद्धालुओं की आत्मशांति के लिए हवन किया जा रहा है। गया को मोक्ष की नगरी के रूप में जाना जाता है और यहां हर साल लाखों तीर्थयात्री आते हैं।
घटना के कारणों पर उठे सवाल
हवन में शामिल लोगों ने कहा कि महाकुंभ में कोई न कोई कमी जरूर रही होगी, जिसके कारण इस तरह की भगदड़ जैसी घटना हुई। घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पर ध्यान दिया है और घटना के कारणों की जांच की जा रही है। हवन कार्यक्रम के दौरान सभी ने प्रार्थना की कि बचे हुए महाकुंभ के दिन शांति और व्यवस्था बनी रहे और मेला अच्छे तरीके से संपन्न हो।
इस कार्यक्रम में विभिन्न राजनीतिक दलों और समाजसेवियों ने हिस्सा लिया। हवन के दौरान आसपास के लोग भी जुटे और इस शोक सभा में शामिल हुए। लोगों ने श्रद्धालुओं की आत्मा की शांति की कामना की और यह भी कामना की कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।