गया शहर स्थित अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज सह अस्पताल, जो मगध क्षेत्र का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल माना जाता है, इन दिनों LPG कमर्शियल गैस सिलेंडर की भारी किल्लत से जूझ रहा है। इस संकट का सीधा असर अस्पताल में भर्ती मरीजों के भोजन पर पड़ा है। हालात ऐसे हैं कि अब यहां रोजाना करीब 600 मरीजों के लिए खाना कोयले और लकड़ी के चूल्हे पर तैयार किया जा रहा है, जिससे रसोई व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है।
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जीविका दीदियों की परेशानी
जीविका दीदी पारो देवी ने बताया कि वे रोजाना सैकड़ों मरीजों के लिए भोजन बनाती हैं और उसे वितरित करती हैं। पहले गैस पर काम आसान था, लेकिन अब लकड़ी और कोयले पर खाना बनाना बेहद मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि कभी मरीजों की संख्या बढ़ जाती है, तो परेशानी और भी बढ़ जाती है।
एक अन्य जीविका दीदी ने बताया कि गैस खत्म होने के बाद उन्हें मजबूरी में कोयले के चूल्हे पर खाना बनाना पड़ रहा है। इतने बड़े स्तर पर भोजन तैयार करना काफी चुनौतीपूर्ण हो गया है और इसमें अधिक समय भी लग रहा है।
महंगे सिलेंडर, सीमित उपयोग
कैंटीन मैनेजर मनीष दीपक ने बताया कि अस्पताल में जीविका के तहत कैंटीन संचालित होता है, जहां मरीजों को नियमित भोजन उपलब्ध कराया जाता है। लेकिन फिलहाल कमर्शियल गैस सप्लायर ने सिलेंडर देने से मना कर दिया है। जो कुछ सिलेंडर मिल भी रहे हैं, उनकी कीमत काफी बढ़ा दी गई है।