बिहार के गया जिला अंतर्गत बाराचट्टी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव के बाद एक महिला की मौत से हड़कंप मच गया। परिजनों ने अस्पताल कर्मियों पर इलाज में गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए थाने में शिकायत दर्ज कराई है। घटना के बाद अस्पताल परिसर में कुछ देर तक तनावपूर्ण माहौल बना रहा, जबकि पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।
प्रसव के बाद बिगड़ी हालत, नहीं बच सकी प्रसूता
गया जिले के बाराचट्टी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव के दौरान एक महिला की मौत के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। मृतका की पहचान बाराचट्टी के शर्मा बाजार निवासी कुसुम कुमारी के रूप में हुई है। वह मूल रूप से मोहनपुर थाना क्षेत्र के अजनामा गांव निवासी रविंद्र प्रसाद की पुत्री थीं। जानकारी के मुताबिक, आशा कार्यकर्ता गीता कुमारी प्रसव पीड़ा होने पर कुसुम कुमारी को सीएचसी बाराचट्टी लेकर पहुंचीं, जहां उन्हें भर्ती कर इलाज शुरू किया गया।
जुड़वा बच्चों के जन्म के बाद अचानक बिगड़ी तबीयत
अस्पताल में जीएनएम किरण कुमारी तथा एएनएम रजनी कुमारी और अर्पण कुमारी की देखरेख में प्रसव कराया गया। परिजनों का कहना है कि कुसुम कुमारी ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया, लेकिन इसके कुछ ही देर बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। काफी प्रयास के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
'मौत के बाद भी रेफर करने की बात कही'
मृतका के पिता रविंद्र प्रसाद ने आरोप लगाया कि उनकी बेटी की मौत हो जाने के बाद भी अस्पताल कर्मियों ने अत्यधिक रक्तस्राव का हवाला देते हुए बेहतर इलाज के लिए गया रेफर करने की बात कही। परिजनों का कहना है कि जब महिला की मौत हो चुकी थी, तब रेफर करने का कोई औचित्य नहीं था। इसी बात को लेकर अस्पताल परिसर में कुछ देर तक हंगामा भी हुआ।
स्वास्थ्यकर्मियों पर गंभीर लापरवाही का आरोप
मृतका के पिता ने स्थानीय थाने में लिखित आवेदन देकर जीएनएम किरण कुमारी तथा एएनएम रजनी कुमारी और अर्पण कुमारी पर इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी कर्मियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
यह भी पढ़ें:
कायस्थ को ही बांकीपुर से भाजपा ने उतारा, मगर नाम चौंकाने वाला; कौन हैं BJP प्रत्याशी अभिषेक?
पुलिस बोली- जांच के बाद होगी कार्रवाई
स्थानीय पुलिस ने बताया कि परिजनों से लिखित शिकायत प्राप्त हुई है। मामले की जांच शुरू कर दी गई है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल इस घटना ने सरकारी अस्पतालों में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं और प्रसव के दौरान उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।