Bihar: पिंडदान करने वाले व्यक्ति अपने पितरों के स्वर्ग मार्ग को प्रकाशमय करने के लिए प्रकाश करते हैं। मानना है कि पितरों के राह में अंधेरा न हो, उन्हें प्रकाश मिले और वे खुश होकर आशीर्वाद दें।
गयाजी के विष्णुपद मंदिर और फल्गु नदी के देवघाट पर शुक्रवार को पितृ दीपावली मनाई गई। पितृपक्ष के 14 वें दिन त्रयोदशी के दिन पितृ दीपावली मनाए जाने की परंपरा है। पितरों के लिए घी का दीया जलाकर खुशी मनाई जाती है।
विज्ञापन
ऐसी मान्यता है कि आज के दिन दीपदान और पितृ दीपावली मनाने से पितरों के स्वर्ग जाने का मार्ग प्रकाशमय हो जाता है। इस दौरान देश विदेश के कोने कोने से आए तीर्थयात्रीयो के द्वारा आकर्षक रंगोली और आकर्षक रूप से घी का दीया को जलाया, जिससे पूरा विष्णुपद मंदिर परिसर और देवघाट रौशनी से जगमग हो गया।
पितृ दीपावली को लेकर तीर्थयात्रियों में काफी खुशी दिखी। तीर्थयात्रियों के जरिए स्वास्तिक और ओम लिखकर घी का दीया जलाया। तीर्थयात्री पितरों को मोक्ष मिलने के बाद अपनी खुशी का इजहार करते हैं।
विज्ञापन
पितृपक्ष मेला की अवधि में देश-दुनिया के कोने कोने से लाखों की संख्या में हिंदू सनातन धर्मावलंबी यहां आकर अपने पितरों को मोक्ष और उद्धार की कामना करते हैं। साथ ही पिंडदान, तर्पण औश्र कर्मकांड कार्य को पूरा करते हैं।
पिंडदान करने वाले व्यक्ति अपने पितरों के स्वर्ग मार्ग को प्रकाशमय करने के लिए प्रकाश करते हैं। मानना है कि पितरों के राह में अंधेरा न हो, उन्हें प्रकाश मिले और वे खुश होकर आशीर्वाद दें।
उड़ीसा के कटक से आए दीपक अग्रवाल और उमा अग्रवाल ने बताया कि वह गयाजी में पिंडदान और श्राद्ध कार्य कर रहे हैं। आज पितृ दीपावली के मौके पर पितरों का फोटो और पितरों के नाम पर दीप जलाकर पितृ दीपावली को मना रहे हैं, ताकि पितृ खुश हों और हमलोगों को आशीर्वाद दें।