दिल्ली दंगों के आरोपी शरजील इमाम करीब छह साल बाद 11 दिनों की पैरोल पर अपने पैतृक गांव जहानाबाद के काको पहुंचे हैं। उन्हें यह राहत अपने भाई मुज़्जमिल इमाम की शादी में शामिल होने के लिए मिली है।
दिल्ली दंगे के आरोपी शरजील इमाम करीब छह वर्षों के बाद जेल से पैरोल पर अपने पैतृक गांव जहानाबाद के काको पहुंचे हैं। शरजील इमाम वर्ष 2020 में दिल्ली दंगों के मामले में यूएपीए (UAPA) के तहत जेल में बंद हैं। कोर्ट ने उन्हें उनके भाई मुज़्जमिल इमाम की शादी में शामिल होने के लिए 11 दिनों की पैरोल दी है। इसके बाद वह 20 मार्च की देर रात अपने गांव काको पहुंचे।
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परिवार में खुशी का माहौल
शरजील इमाम के घर पहुंचने पर पूरे परिवार में खुशी का माहौल है। परिवार की खुशियां इसलिए भी दोगुनी हो गई हैं क्योंकि उन्हें ईद के साथ-साथ भाई की शादी में शामिल होने का मौका मिला है। शरजील इमाम 20 मार्च से 30 मार्च तक पैरोल पर जेल से बाहर रहेंगे।
मीडिया से नहीं की बातचीत
पैतृक गांव पहुंचने के बाद जब मीडिया ने उनसे बातचीत करने की कोशिश की, तो उन्होंने किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया। हालांकि, इस दौरान उनके भाई मुज़्जमिल इमाम ने कहा कि उनकी पूरी उम्मीद न्याय पर टिकी है और उन्हें न्यायालय पर पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा कि जिन मुद्दों की बात हो रही है, उसका फैसला अदालत ही करेगी। गौरतलब है कि शरजील इमाम IIT बॉम्बे से इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुके हैं। उनके पिता अशरफ इमाम जदयू से जहानाबाद विधानसभा का चुनाव भी लड़ चुके हैं।
शरजील इमाम पर वर्ष 2020 में दिल्ली में CAA के विरोध के दौरान दंगा भड़काने और भड़काऊ भाषण देने का आरोप है। इसके साथ ही उनके खिलाफ यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया गया था। वह 2020 से ही दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं। करीब छह साल जेल में रहने के बाद अब उन्हें भाई की शादी में शामिल होने के लिए पैरोल दी गई है।
करीब छह साल बाद शरजील इमाम के घर लौटने से पूरे गांव में खुशी का माहौल है। ईद और शादी के अवसर ने इस खुशी को और बढ़ा दिया है। फिलहाल, शरजील इमाम के मामले में अदालत क्या फैसला सुनाती है, यह आने वाला समय बताएगा, लेकिन उनके घर लौटने से गांव में ईद की खुशियां दोगुनी हो गई हैं।