जहानाबाद जिला शनिवार को अत्यंत शोक एवं गर्व के मिश्रित भावों के साथ अपने महान सपूत, स्वतंत्रता सेनानी साधु शरण सिंह को अंतिम विदाई दिया। सिंह का निधन उनके पैतृक गांव टीमलपुर में हो गया। वे 101 वर्ष के दीर्घ जीवन में देश, समाज एवं मूल्यों के प्रति अपने अटूट समर्पण के प्रतीक बने रहे।
साधु शरण सिंह का जन्म 12 मई 1924 को जहानाबाद जिले के काको प्रखंड अंतर्गत टीमलपुर गांव में हुआ था। उनका जीवन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को समर्पित रहा। युवा अवस्था में ही उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध संघर्ष में भागीदारी ली। वे उन निर्भीक योद्धाओं में से थे, जिन्होंने देश की आज़ादी के लिए अपने जीवन की परवाह न करते हुए सत्य, स्वराज और स्वतंत्रता के लिए जेल यातनाएं सही और कठोर परिस्थितियों में भी डटे रहे।
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भारत सरकार ने 1972 में स्वतंत्रता की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर देश के स्वतंत्रता सेनानियों को स्वर्ण जयंती सम्मान पत्र प्रदान किया था। साधु शरण सिंह को यह गौरव तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा प्राप्त हुआ। यह सम्मान पत्र आज भी उनके परिजनों द्वारा बड़े गर्व से संरक्षित किया गया है, जो आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति का जीवंत प्रमाण देता रहेगा। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भी सिंह ने सामाजिक जीवन में सक्रिय रहते हुए ग्रामीण चेतना, स्वाभिमान एवं शिक्षा के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे स्थानीय स्तर पर न्याय प्रिय, संयमी एवं मार्गदर्शक व्यक्तित्व के रूप में हमेशा सम्मानित रहे।
उनकी अंतिम यात्रा के अवसर पर जिला पदाधिकारी अलंकृता पांडेय एवं पुलिस अधीक्षक अरविंद प्रताप सिंह ने उनके निवास स्थान पर पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की। बड़ी संख्या में ग्रामीणजन, जनप्रतिनिधिगण, सामाजिक कार्यकर्ता और प्रशासनिक पदाधिकारी उपस्थित हुए और नम आंखों से अंतिम विदाई दी।
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जहानाबाद जिला प्रशासन एवं समस्त नागरिक समाज की ओर से इस महान स्वतंत्रता सेनानी को शत-शत नमन करते हुए हम उनके चरणों में अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। उनकी देशभक्ति, निष्ठा और त्यागभावना हमेशा हमें प्रेरणा देती रहेगी।