दिल्ली में हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे ने बिहार के गया जिले के एक छोटे से महादलित टोला चपरी को गहरे शोक में डुबो दिया। हरियाणा के रेवाड़ी में मजदूरी करने जा रहे मजदूरों से भरी एक पिकअप वाहन के पलटने से तीन मासूम बच्चों समेत चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दस से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। यह हादसा बुधवार सुबह दिल्ली के द्वारका सेक्टर-23 इलाके में हुआ, जब पिकअप वाहन का टायर फट गया और वह अनियंत्रित होकर पलट गया।
दिल्ली पहुंचते ही उजड़ गया सपना
जानकारी के मुताबिक, मंगलवार को गया जिले के इमामगंज प्रखंड अंतर्गत झिकटिया पंचायत के चपरी गांव से करीब 30 मजदूर, अपने पूरे परिवार के साथ दिल्ली के लिए निकले थे। वे दिल्ली के निजामुद्दीन स्टेशन पर उतरे और वहां से एक पिकअप वाहन के जरिए हरियाणा के रेवाड़ी स्थित एक निर्माण स्थल की ओर रवाना हुए। लेकिन उनका यह सफर किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा। द्वारका सेक्टर 23 के पास जैसे ही वाहन पहुंचा, टायर फटने के कारण वह पलट गया और कई मजदूर उसके नीचे दब गए।
चार लोगों की मौत और दस घायल, गांव में मचा कोहराम
इस हादसे में चपरी गांव के रणजीत कुमार (26) पिता फेकू मांझी की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। उनके साथ तीन मासूम बच्चे भी इस हादसे का शिकार बन गए। इनमें लक्ष्मीनिया कुमारी पिता रणजीत भारती, शीशम कुमारी (7) पिता राजेश भारती और गौरव कुमार (7) पिता संजय मांझी शामिल हैं। इसके अलावा करीब दस अन्य मजदूर घायल हैं, जिनमें कई की हालत गंभीर बताई जा रही है।
महादलित टोले में पसरा मातम, रोते-बिलखते परिजन
जब हादसे की खबर गांव पहुंची तो चपरी गांव में कोहराम मच गया। पूरे टोले में शोक का माहौल है। जिन परिवारों ने अपनों को खोया, उनके घरों में चूल्हा तक नहीं जला। महिलाओं के विलाप और बच्चों की सिसकियों से गांव का हर कोना गूंज उठा। गांववालों के अनुसार यह पहली बार नहीं है जब इस तरह का कोई हादसा हुआ हो, लेकिन इस बार दर्द और गहराई से महसूस किया जा रहा है क्योंकि मासूम बच्चों की जान गई है।
मंत्री ने जताई संवेदना, व्यवस्था का दिया भरोसा
घटना पर बिहार सरकार के सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री संतोष कुमार सुमन ने गहरी संवेदना जताई है। उन्होंने कहा कि हमें सुबह ही इस हादसे की जानकारी मिल गई थी। घायलों और बचे हुए लोगों को हमारे आवास पर बुलाया गया है। उनके रहने और इलाज की व्यवस्था की जा रही है। जिनकी मौत हुई है, उनके पार्थिव शरीर को वापस भेजने की कोशिश की जा रही है।
पलायन और बंधुआ मजदूरी पर मंत्री का सवाल
मंत्री संतोष सुमन ने इस अवसर पर बिहार से मजदूरों के पलायन और बंधुआ मजदूरी पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कुछ लोग भोले-भाले मजदूरों को बरगला कर बाहर ले जाते हैं और दिन-रात काम करवाते हैं, लेकिन बदले में मजदूरी नाममात्र की दी जाती है। यह बंधुआ मजदूरी का ही रूप है। उन्होंने ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की और भरोसा दिलाया कि बिहार सरकार रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने के लिए कृतसंकल्पित है।